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शिवलिंग प्रकार📜 शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), शिल्प शास्त्र, आगम ग्रंथ2 मिनट पठन

शिवलिंग की ऊंचाई और चौड़ाई का शास्त्रीय अनुपात क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता): ऊंचाई:चौड़ाई = 2:1 (दोगुनी ऊंचाई)। मंदिर: यजमान के 12 अंगुल ऊंचाई उत्तम। तीन भाग: ब्रह्म (चौकोर, गड़ा), विष्णु (अष्टकोणीय, पीठिका), रुद्र (गोलाकार, पूजित)। घर: 2-4 इंच ऊंचाई, 1-2 इंच व्यास आदर्श।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग की ऊंचाई और चौड़ाई का अनुपात शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता और शिल्प शास्त्र में वर्णित है:

शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता) के अनुसार

1मंदिर के शिवलिंग

  • लिंग की लंबाई (ऊंचाई) निर्माणकर्ता/यजमान के 12 अंगुल के बराबर होनी चाहिए — यह उत्तम है।
  • इससे कम हो तो फल में कमी, अधिक हो तो कोई दोष नहीं।
  • शिवलिंग-पीठ 'ऊपर-नीचे मोटा और बीच में पतला' — खाट के पाये की भांति — ऐसा पीठ महान फल देने वाला होता है।

2सामान्य अनुपात

  • ऊंचाई : व्यास (चौड़ाई) = 2:1 — अर्थात ऊंचाई चौड़ाई से दोगुनी।
  • यह सर्वाधिक प्रचलित और शुभ अनुपात माना गया है।

3तीन भाग

शिवलिंग की पीठिका (आधार) तीन भागों में विभक्त:

  • ब्रह्म भाग (निचला): चौकोर — जमीन में गड़ा रहता है, दिखता नहीं।
  • विष्णु भाग (मध्य): अष्टकोणीय — पीठिका का दृश्य भाग।
  • रुद्र भाग (ऊपरी): गोलाकार — पूजित भाग।

4चर (गृह) शिवलिंग

  • चर लिंग (घर में रखने वाला) की लंबाई कम से कम कर्ता के एक अंगुल के बराबर होनी चाहिए।

5बाणलिंग

बाणलिंग के लिए लिंग और पीठ का एक ही उपादान होना अनिवार्य नहीं — यह विशेष अपवाद है।

व्यावहारिक मार्गदर्शन

घर के शिवलिंग के लिए: 2-4 इंच ऊंचाई, 1-2 इंच व्यास — यह आदर्श अनुपात है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), शिल्प शास्त्र, आगम ग्रंथ
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