शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता): ऊंचाई:चौड़ाई = 2:1 (दोगुनी ऊंचाई)। मंदिर: यजमान के 12 अंगुल ऊंचाई उत्तम। तीन भाग: ब्रह्म (चौकोर, गड़ा), विष्णु (अष्टकोणीय, पीठिका), रुद्र (गोलाकार, पूजित)। घर: 2-4 इंच ऊंचाई, 1-2 इंच व्यास आदर्श।
- 1लिंग की लंबाई (ऊंचाई) निर्माणकर्ता/यजमान के 12 अंगुल के बराबर होनी चाहिए — यह उत्तम है।
- 2इससे कम हो तो फल में कमी, अधिक हो तो कोई दोष नहीं।
- 3शिवलिंग-पीठ 'ऊपर-नीचे मोटा और बीच में पतला' — खाट के पाये की भांति — ऐसा पीठ महान फल देने वाला होता है।
- 4ऊंचाई : व्यास (चौड़ाई) = 2:1 — अर्थात ऊंचाई चौड़ाई से दोगुनी।
- 5यह सर्वाधिक प्रचलित और शुभ अनुपात माना गया है।
- 6ब्रह्म भाग (निचला): चौकोर — जमीन में गड़ा रहता है, दिखता नहीं।
- 7विष्णु भाग (मध्य): अष्टकोणीय — पीठिका का दृश्य भाग।
- 8रुद्र भाग (ऊपरी): गोलाकार — पूजित भाग।
- 9चर लिंग (घर में रखने वाला) की लंबाई कम से कम कर्ता के एक अंगुल के बराबर होनी चाहिए।