विस्तृत उत्तर
शिव पुराण में श्लोकों की संख्या दो स्तरों पर बताई जाती है।
मूल शिव पुराण — शिव पुराण के आरंभ में ही बताया गया है कि मूल शिव पुराण में एक लाख श्लोक हैं। इसमें सभी बारह संहिताओं का समाहरण था।
व्यासकृत संक्षिप्त रूप — व्यासजी ने इसे संक्षिप्त कर 24,000 श्लोकों में सात संहिताओं के रूप में प्रस्तुत किया। यही 24,000 श्लोकों वाला रूप आज उपलब्ध और प्रचलित है। शिव पुराण के द्वितीय अध्याय में स्वयं कहा गया है — 'व्यासजी ने इसे चौबीस हजार श्लोकों में संक्षिप्त कर दिया है।'
पुराणों की क्रम संख्या में शिव पुराण का स्थान चौथा माना गया है।




