का सरल उत्तर
मूल शिव पुराण में एक लाख श्लोक थे। व्यासजी ने इसे संक्षिप्त कर 24,000 श्लोकों में प्रस्तुत किया — यही रूप आज उपलब्ध है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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