विस्तृत उत्तर
शिव पुराण की उत्पत्ति और लेखन के विषय में शिव पुराण स्वयं स्पष्ट बताता है।
मूल प्रणयन — इस वेदतुल्य पुराण का सर्वप्रथम प्रणयन स्वयं भगवान शिव ने किया था। शिव पुराण में कहा गया है — 'इस वेद कल्प पुराण का सबसे पहले भगवान शिव ने ही प्रणयन किया था।' इसीलिए इसे 'शिव महापुराण' कहते हैं — यह शिव-वाणी है।
संक्षिप्त संकलन — महर्षि व्यास ने इस विशाल ग्रंथ को संक्षिप्त कर 24,000 श्लोकों में सात संहिताओं के रूप में संकलित किया। इसीलिए व्यासजी को इसका संकलनकर्ता कहा जाता है।
प्रसार — सूत जी ने नैमिषारण्य में ऋषियों को यह कथा सुनाई। इस प्रकार सूतजी शिव पुराण के प्रमुख वक्ता हैं।
संक्षेप में — मूल रचना भगवान शिव की, संकलन-संक्षेपण व्यासजी का, और प्रसार सूतजी के माध्यम से।





