विस्तृत उत्तर
पाशुपतास्त्र की उत्पत्ति के बारे में पौराणिक ग्रंथों में दो प्रमुख मान्यताएँ मिलती हैं। पहली मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने इस ब्रह्मांड की रचना से भी पहले घोर तपस्या करके पाशुपतास्त्र को आदिशक्ति से प्राप्त किया था। यह तथ्य इसे एक आदि-अस्त्र के रूप में स्थापित करता है जो सृष्टि की प्रारंभिक और मूलभूत शक्तियों से जुड़ा हुआ है। दूसरी मान्यता के अनुसार यह अस्त्र अमृत मंथन के समय या उसके प्रभाव से अमृत से प्रकट हुआ और तपस्या के प्रभाव से भगवान शंकर को प्राप्त हुआ।
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