विस्तृत उत्तर
वर्तमान में प्रचलित शिव पुराण में सात संहिताएँ हैं। रुद्र संहिता के पाँच खंड और वायवीय संहिता के दो खंड होने के कारण कुल अध्याय-खंड आठ माने जाते हैं।
सात संहिताओं के नाम क्रमशः —
पहली — विद्येश्वर संहिता: शिवलिंग पूजा, शिवरात्रि व्रत, पंचकृत्य, ओंकार और रुद्राक्ष-भस्म का महत्व।
दूसरी — रुद्र संहिता: यह सबसे विस्तृत संहिता है जिसमें पाँच खंड हैं — सृष्टि खंड, सती खंड, पार्वती खंड, कुमार खंड और युद्ध खंड।
तीसरी — शतरुद्र संहिता: शिव के शत (सौ) रूपों और उनके अवतारों का वर्णन।
चौथी — कोटिरुद्र संहिता: बारह ज्योतिर्लिंगों का विस्तृत वर्णन।
पाँचवीं — उमा संहिता: देवी पार्वती (उमा) के चरित्र और लीलाओं का वर्णन।
छठी — कैलाश संहिता: कैलाश धाम, शिव-तत्व और योग का वर्णन।
सातवीं — वायवीय संहिता: इसके दो खंड हैं — पूर्व भाग और उत्तर भाग। शिव-तत्व का गहन दार्शनिक विवेचन।





