विस्तृत उत्तर
कोटिरुद्र संहिता शिव पुराण की चौथी संहिता है और इसमें 9,000 श्लोक हैं। यह संहिता शिव-भक्तों में सर्वाधिक प्रसिद्ध है क्योंकि इसमें भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का विस्तृत वर्णन है।
बारह ज्योतिर्लिंग — इस संहिता में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति, महिमा और उनसे जुड़ी कथाओं का विस्तृत वर्णन है। ये बारह ज्योतिर्लिंग हैं — सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश), महाकालेश्वर (उज्जैन), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश), केदारनाथ (उत्तराखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), काशी विश्वनाथ (वाराणसी), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), वैद्यनाथ (झारखंड), नागेश्वर (गुजरात/आंध्र), रामेश्वरम (तमिलनाडु), और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)।
प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति का कारण और उससे संबंधित पौराणिक कथाएँ इस संहिता में विस्तार से वर्णित हैं। कोटिरुद्र संहिता पढ़ने-सुनने मात्र से ज्योतिर्लिंग-दर्शन का फल मिलता है।




