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शिव पुराण परिचय⏱ 1 मिनट पठन

कोटिरुद्र संहिता में क्या है?

कोटिरुद्र संहिता शिव पुराण की चौथी संहिता है और इसमें 9,000 श्लोक हैं।

संक्षिप्त उत्तर

कोटिरुद्र संहिता (9,000 श्लोक) में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों — सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर — की उत्पत्ति और महिमा का वर्णन है।

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विस्तृत उत्तर

कोटिरुद्र संहिता शिव पुराण की चौथी संहिता है और इसमें 9,000 श्लोक हैं। यह संहिता शिव-भक्तों में सर्वाधिक प्रसिद्ध है क्योंकि इसमें भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का विस्तृत वर्णन है।

बारह ज्योतिर्लिंग — इस संहिता में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति, महिमा और उनसे जुड़ी कथाओं का विस्तृत वर्णन है। ये बारह ज्योतिर्लिंग हैं — सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश), महाकालेश्वर (उज्जैन), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश), केदारनाथ (उत्तराखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), काशी विश्वनाथ (वाराणसी), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), वैद्यनाथ (झारखंड), नागेश्वर (गुजरात/आंध्र), रामेश्वरम (तमिलनाडु), और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)।

प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति का कारण और उससे संबंधित पौराणिक कथाएँ इस संहिता में विस्तार से वर्णित हैं। कोटिरुद्र संहिता पढ़ने-सुनने मात्र से ज्योतिर्लिंग-दर्शन का फल मिलता है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

कोटिरुद्र संहिता में क्या है को संदर्भ सहित समझें

कोटिरुद्र संहिता में क्या है का सबसे सीधा सार यह है: कोटिरुद्र संहिता (9,000 श्लोक) में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों — सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर — की उत्पत्ति और...

शिव पुराण परिचय जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

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