विस्तृत उत्तर
काशी विश्वनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे सभी लिंगों में विशेष स्थान प्राप्त है। यह गंगा नदी के पश्चिमी तट पर वाराणसी में स्थित है।
काशी का रहस्य: शिव पुराण के अनुसार, सदाशिव ने ही काशी की सृष्टि की और अपनी प्रिय नगरी के रूप में यहाँ माता पार्वती के साथ सदैव निवास करते हैं। कहा जाता है कि यह नगरी भगवान शिव के त्रिशूल की नोक पर बसी है — इसलिए प्रलय के समय भी काशी का विनाश नहीं होता। यहाँ की धरती स्वयं शिव की शक्ति से अभिमंत्रित है।
तारक मंत्र और मोक्ष का रहस्य: काशी को मोक्ष नगरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ प्राण त्यागने वाले प्रत्येक प्राणी के कान में स्वयं भगवान शिव मुक्तिदायक 'तारक मंत्र' का उपदेश करते हैं। शिव पुराण में स्पष्ट है कि काशी में मरने वाला घोर पापी भी इस तारक मंत्र के प्रभाव से पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है। इसीलिए अनेक श्रद्धालु जीवन के अंतिम दिन काशी में बिताने की कामना रखते हैं।
मणिकर्णिका और काशी का रहस्य: मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार करने से मोक्ष मिलता है — यह मान्यता है। एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के कान की मणि यहाँ गिरी थी।
काल भैरव का महत्व: काशी के कोतवाल काल भैरव हैं — भगवान शिव का यह अवतार काशी की रक्षा करता है। ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद काल भैरव के दर्शन किए बिना काशी यात्रा अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार एकमात्र काशी विश्वनाथ के एक बार श्रद्धापूर्वक दर्शन से वह पुण्य मिलता है जो सभी ज्योतिर्लिंगों के पूजन से मिलता है।





