विस्तृत उत्तर
श्री बदरीनाथ धाम भारत के चार धामों में से एक है और समुद्र तल से लगभग 3133 मीटर की ऊँचाई पर अलकनंदा नदी के तट पर, चमोली जिले में स्थित है। शीतकाल में भारी बर्फ़बारी के कारण यह मंदिर भी वर्ष में लगभग 6 महीने बंद रहता है।
कपाट खुलने की तिथि घोषणा: परंपरा के अनुसार, प्रत्येक वर्ष वसंत पंचमी के पावन अवसर पर टिहरी रियासत के नरेंद्रनगर राजमहल में एक धार्मिक समारोह में पंचांग गणना के बाद बदरीनाथ के कपाट खुलने की तिथि और शुभ मुहूर्त घोषित किया जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है जिसमें टिहरी राजपरिवार की सक्रिय भूमिका होती है।
कपाट खुलने की विधि: ब्रह्म मुहूर्त में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कपाट खोले जाते हैं। इससे पहले जोशीमठ के नृसिंह मंदिर से भगवान विष्णु की चल मूर्ति की 'गरुड़ डोली यात्रा' आरंभ होती है जो ऋषिकेश, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और पांडुकेश्वर होते हुए बदरीनाथ पहुँचती है। नरेंद्रनगर की सुहागिन महिलाएँ महाभिषेक के लिए तिलों का तेल निकालती हैं, जो डोली के साथ ही धाम पहुँचता है।
वर्ष 2025 में कपाट 4 मई को सुबह 6 बजे खुले थे। वर्ष 2026 में कपाट 23 अप्रैल को प्रातः 6:15 बजे खुलने की घोषणा की गई है। मंदिर सामान्यतः नवंबर में बंद होते हैं — 2025 में 25 नवंबर को कपाट बंद हुए। बंद होने से पहले 'पंच पूजा' का पाँच दिवसीय विशेष अनुष्ठान होता है।
शीतकाल में भगवान बदरी विशाल जोशीमठ स्थित श्री नृसिंह मंदिर में निवास करते हैं — वहाँ उनके शीतकालीन दर्शन होते हैं।





