विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप इसलिए धारण किया क्योंकि केवल माया और छल से ही भस्मासुर जैसे कुपात्र को उसकी अपनी ही शक्ति से नष्ट किया जा सकता था।
जब भस्मासुर ने शिव जी पर हाथ रखने का प्रयास किया, तब शिव जी को भागना पड़ा — वे सीधे उसका वध नहीं कर सकते थे क्योंकि एक तो वह उनका भक्त था, दूसरे यदि शिव स्वयं उसका वध करते तो उनका अपना वरदान झूठा हो जाता। शिव वचन असत्य नहीं हो सकता। अतः शिव ने भागकर भगवान विष्णु की शरण ली और संकट बताया।
विष्णु ने उपाय सोचा — भस्मासुर की दो कमजोरियाँ थीं: सुंदर स्त्री के प्रति उसकी आसक्ति और नृत्य में उसकी अरुचि। इन दोनों का उपयोग करके विष्णु ने अत्यंत रूपवती नर्तकी मोहिनी का रूप धारण किया और भस्मासुर के मार्ग में प्रकट हुए। भस्मासुर मोहिनी के अप्रतिम सौंदर्य पर मोहित हो गया और शिव को भूल गया।
मोहिनी ने उसे नृत्य सिखाने का प्रस्ताव रखा। नृत्य के क्रम में मोहिनी ने अपना हाथ अपने सिर पर रखा — भस्मासुर ने भी उसकी नकल करते हुए अपना हाथ अपने सिर पर रख दिया और उसी क्षण शिव के वरदान से वह स्वयं भस्म हो गया। इस प्रकार विष्णु की माया-लीला ने शिव जी की रक्षा की।





