विस्तृत उत्तर
मोहिनी रूपधारी भगवान विष्णु ने भस्मासुर का वध एक अत्यंत चतुर, माया-पूर्ण लीला से किया — बिना एक बार भी सीधे लड़े।
जब भस्मासुर शिव जी का पीछा करते हुए जंगल में था, तभी उसे मोहिनी — एक अप्रतिम सुंदरी — दिखी। उसकी सुंदरता देखकर भस्मासुर अपना उद्देश्य भूल गया और उससे विवाह करने की इच्छा प्रकट की।
मोहिनी ने कहा — 'मैं केवल उसी से विवाह करूँगी जो मेरे साथ नृत्य में मेरा अनुसरण कर सके।' भस्मासुर को नृत्य आता नहीं था, पर मोहिनी को पाने के लिए वह तैयार हो गया। मोहिनी ने नृत्य की विभिन्न मुद्राएं दिखाईं और भस्मासुर उनकी हूबहू नकल करता रहा।
नृत्य के अंतिम चरण में मोहिनी ने एक बहुत आकर्षक मुद्रा बनाई — एक पैर ऊपर उठाया, एक हाथ होंठों पर रखा और दूसरा हाथ अपने सिर पर रखा। भस्मासुर ने बिना सोचे वही मुद्रा दोहराई — और जैसे ही उसका हाथ उसके अपने सिर पर पड़ा, शिव जी का वरदान सक्रिय हो गया। एक पल में वह धू-धू करके जलने लगा और भस्म हो गया।
इस प्रकार भस्मासुर अपनी ही मूर्खता और कामवासना के कारण अपनी ही शक्ति से नष्ट हो गया। तब मोहिनी रूपधारी विष्णु ने अपना असली रूप प्रकट किया और शिव जी से मिले।





