विस्तृत उत्तर
गजासुर एक शक्तिशाली दैत्य था जिसका रूप हाथी (गज) जैसा था। शिव पुराण की रुद्र संहिता और स्कंद पुराण दोनों में उसकी कथा का विस्तृत वर्णन मिलता है।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार गजासुर महिषासुर का पुत्र था — वही महिषासुर जिसका वध माँ दुर्गा ने किया था। पिता की मृत्यु के समय गजासुर छोटा था। पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर वह क्रोधित हो गया और अपने कुल के गौरव को पुनः स्थापित करने तथा देवताओं से बदला लेने का संकल्प किया।
गजासुर बहुत विशाल और शक्तिशाली था। उसका शरीर गज (हाथी) के समान था — इसीलिए उसे 'गजासुर' कहा गया। वह स्वभाव से उग्र और युद्धप्रिय था। उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या करके वरदान प्राप्त किया और फिर तीनों लोकों में आतंक मचाया।
गजासुर की कथा का एक विशेष पहलू यह है कि वह भगवान शिव का परम भक्त भी था। मृत्यु के समय उसने शिव से ऐसा वरदान माँगा जो उसे अमर कर गया — उसका शरीर काशी में कृत्तिवासेश्वर ज्योतिर्लिंग बन गया। शिव ने उसकी खाल को धारण करके 'कृत्तिवासा' नाम पाया।





