विस्तृत उत्तर
शंकुकर्णेश्वर महादेव काशी क्षेत्र में स्थित एक 'गुप्त शिवलिंग' हैं, जिनकी स्थापना भगवान शिव के परम प्रिय गण 'शंकुकर्ण' ने की थी।
स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53-54) के अनुसार, राजा दिवोदास के शासनकाल में भगवान शिव को काशी छोड़कर मंदराचल पर्वत पर जाना पड़ा। काशी की स्थिति जानने के लिए शिव ने अपने गणों को भेजा। ये गण काशी की अलौकिक दिव्यता से इतने मोहित हुए कि वापस नहीं लौटे — उन्होंने वहीं रहकर शिवलिंगों की स्थापना की।
इन्हीं गणों में शंकुकर्ण ने काशी में घोर तपस्या कर एक अलौकिक शिवलिंग की स्थापना की, जो उन्हीं के नाम पर 'शंकुकर्णेश्वर महादेव' के रूप में विख्यात हुआ।
काशी खंड के अध्याय 69 में इस शिवलिंग को काशी के उन 68 अति-मनमोहक और पाप-नाशक शिवलिंगों में गिना गया है जो मोक्षदायिनी शक्ति से परिपूर्ण हैं।





