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शंकुकर्ण से जुड़े सभी प्रश्न(3)

शंकुकर्ण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

काशी के शिवलिंग

'शंकुकर्ण' नाम का अर्थ और व्युत्पत्ति क्या है?

'शंकु' (तीक्ष्ण/नुकीला) + 'कर्ण' (कान) = ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियां ग्रहण करने में सक्षम सत्ता। यह शिवलिंग नाद-ब्रह्म का प्रतीक है — यहां मंत्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा से अनुनाद स्थापित कर तत्काल फलित होते हैं।

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काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव पर अभिषेक के बाद ताली क्यों बजाते हैं?

अभिषेक के बाद ताली का नाद ध्यानमग्न शिव का ध्यान आकृष्ट करता है। शंकुकर्ण नाम ही ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियां ग्रहण करने से जुड़ा है — इसलिए यहां ताली का नाद विशेष प्रभावी और मंत्रों को बहुगुणित करने वाला।

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काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव कौन हैं और इनकी स्थापना किसने की?

शंकुकर्णेश्वर महादेव काशी का गुप्त शिवलिंग है, जिसे शिवगण 'शंकुकर्ण' ने स्थापित किया। काशी खंड अध्याय 69 में इसे काशी के 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में गिना गया है।

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