विस्तृत उत्तर
शंकुकर्णेश्वर महादेव पर अभिषेक और पूजा के बाद ताली बजाने की एक प्राचीन और गुप्त आगमिक परंपरा है।
शास्त्रों के अनुसार, शिव की पूजा में जलाभिषेक के बाद ताली बजाने से नाद उत्पन्न होता है, जो ध्यानमग्न महादेव का ध्यान आकृष्ट करता है और वे भक्तों की मनोकामनाओं को शीघ्र सुनते हैं।
यह नाद शंकुकर्णेश्वर के नाद-तत्व से सीधे जुड़ता है। 'शंकुकर्ण' नाम ही ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियों को ग्रहण करने की क्षमता से संबंधित है — इसलिए इस शिवलिंग पर ताली का नाद विशेष प्रभावी होता है और मंत्रों के प्रभाव को बहुगुणित करता है।





