विस्तृत उत्तर
घनकर्णेश्वर महादेव मंदिर में कुछ महत्वपूर्ण निषेध हैं —
हरि-निंदा पूर्णतः वर्जित — मंदिर में विष्णु या किसी देवता की निंदा करना सबसे बड़ा अपराध है। घंटाकर्ण स्वयं हरि-द्वेष के कारण पिशाच योनि में रहे — शिव ने कहा मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं, तभी मुक्ति मिली। हरि-निंदा करने वाले का यहाँ सर्वनाश माना गया है।
परनिंदा और अपशब्द वर्जित — कठोर वचन और दूसरों की निंदा निषिद्ध।
अधिक बोलना वर्जित — इस तीर्थ का प्रमुख नियम 'मौन' और 'श्रवण' है। सकाम प्रार्थनाओं या बकवास के बजाय एकाग्र होकर नाद सुनने का अभ्यास करना चाहिए।
बिना स्नान दर्शन वर्जित — घंटाकर्ण हृद में स्नान या जल-मार्जन के बाद ही शिवलिंग दर्शन का विधान है।





