विस्तृत उत्तर
पितृपक्ष में विवाह/मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। इसके कारण:
- 1पितरों का पक्ष: पितृ पक्ष पूर्णतः पितरों (पूर्वजों) को समर्पित है। इन 15 दिनों में पितर पृथ्वी पर आते हैं — उनकी सेवा, तर्पण और श्राद्ध करना कर्तव्य है। विवाह जैसा उत्सव पितरों की उपेक्षा माना जाता है।
- 1शोक/श्रद्धा काल: यह स्मरण और श्रद्धा का काल है — उत्सव/मांगलिक कार्यों का नहीं। विवाह = उत्सव, श्राद्ध = श्रद्धा — दोनों साथ नहीं।
- 1ज्योतिषीय कारण: इन दिनों सूर्य कन्या राशि में रहता है और दक्षिण दिशा (यम दिशा/पितृ दिशा) प्रबल होती है — मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं।
- 1पितृ दोष: पितृपक्ष में मांगलिक कार्य करने से पितृ दोष लग सकता है — पितर नाराज हो सकते हैं।
- 1मुहूर्त अभाव: पंचांग में पितृपक्ष में कोई शुभ मुहूर्त नहीं दिया जाता — विवाह/गृहप्रवेश आदि के लिए।
अपवाद: अत्यंत आवश्यक हो तो विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लें — कुछ विशेष परिस्थितियों में उपाय बताए जा सकते हैं।





