विस्तृत उत्तर
त्रिपिंडी श्राद्ध = तीन पीढ़ियों (पिता, दादा, परदादा) के पितरों का एक साथ श्राद्ध।
कब करें
- ▸जब तीन पीढ़ियों तक श्राद्ध नहीं किया गया हो।
- ▸पितृ दोष के गंभीर लक्षण हों।
- ▸सपने में तीन पितर (पिता, दादा, परदादा) दुखी दिखें।
- ▸कई वर्षों से श्राद्ध छूटा हो।
विधि
- ▸तीन पिंड बनाए जाते हैं — पिता, दादा और परदादा के नाम से।
- ▸प्रत्येक पिंड पर विधिवत तर्पण मंत्र।
- ▸ब्राह्मण भोजन + दक्षिणा।
कहाँ: त्र्यंबकेश्वर (नासिक) = त्रिपिंडी श्राद्ध का सबसे प्रसिद्ध स्थान। गया, प्रयागराज, काशी में भी।
लाभ: तीन पीढ़ियों के पितरों को मोक्ष, पितृ दोष निवारण।





