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श्राद्ध विधि📜 धर्मशास्त्र1 मिनट पठन

त्रिपिंडी श्राद्ध कब और क्यों करवाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

त्रिपिंडी = तीन पीढ़ियों (पिता+दादा+परदादा) का एक साथ श्राद्ध। कब: 3 पीढ़ी श्राद्ध न हुआ, गंभीर पितृ दोष। त्र्यंबकेश्वर (नासिक) सबसे प्रसिद्ध। तीन पिंड + तर्पण + ब्राह्मण भोजन।

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विस्तृत उत्तर

त्रिपिंडी श्राद्ध = तीन पीढ़ियों (पिता, दादा, परदादा) के पितरों का एक साथ श्राद्ध।

कब करें

  • जब तीन पीढ़ियों तक श्राद्ध नहीं किया गया हो।
  • पितृ दोष के गंभीर लक्षण हों।
  • सपने में तीन पितर (पिता, दादा, परदादा) दुखी दिखें।
  • कई वर्षों से श्राद्ध छूटा हो।

विधि

  • तीन पिंड बनाए जाते हैं — पिता, दादा और परदादा के नाम से।
  • प्रत्येक पिंड पर विधिवत तर्पण मंत्र।
  • ब्राह्मण भोजन + दक्षिणा।

कहाँ: त्र्यंबकेश्वर (नासिक) = त्रिपिंडी श्राद्ध का सबसे प्रसिद्ध स्थान। गया, प्रयागराज, काशी में भी।

लाभ: तीन पीढ़ियों के पितरों को मोक्ष, पितृ दोष निवारण।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मशास्त्र
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