विस्तृत उत्तर
पितृपक्ष में शास्त्रों के अनुसार कई कार्य वर्जित माने गए हैं।
पितृपक्ष में न करें
- 1नया कार्य शुरू न करें — नया व्यापार, गृहप्रवेश, वाहन खरीद।
- 2विवाह/सगाई न करें — मांगलिक कार्य वर्जित।
- 3मुंडन/नामकरण जैसे संस्कार न करें।
- 4मांसाहार-मदिरा पूर्णतः वर्जित (विशेषतः श्राद्ध के दिन)।
- 5प्याज-लहसुन से बचें — सात्विक भोजन करें (Aaj Tak verified)।
- 6लोहे के बर्तन में भोजन न बनाएँ/न खाएँ — कांसा/पीतल उत्तम।
- 7बाल/नाखून न कटवाएँ (कुछ परंपराओं में)।
- 8नए वस्त्र न खरीदें/न पहनें।
- 9दान लेना वर्जित (दान देना शुभ)।
- 10पितरों का अपमान न करें — बड़ों से अच्छा व्यवहार।
क्या करें
- ▸नित्य तर्पण (तिल-जल)।
- ▸सात्विक भोजन।
- ▸गो-सेवा, ब्राह्मण भोजन, दान।
- ▸गीता/गरुड़ पुराण पाठ।
- ▸पीपल को जल चढ़ाएँ।
ध्यान दें: ये पारंपरिक नियम हैं। यदि अत्यंत आवश्यक हो तो विद्वान पंडित से परामर्श लें।





