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श्राद्ध विधि📜 शास्त्र, गरुड़ पुराण (Aaj Tak verified)1 मिनट पठन

पितृपक्ष में क्या नहीं करना चाहिए — विस्तार से?

संक्षिप्त उत्तर

न करें: नया कार्य, विवाह, मुंडन, मांसाहार, प्याज-लहसुन, लोहे बर्तन, बाल कटवाना, नए वस्त्र। करें: तर्पण, सात्विक भोजन, गो-सेवा, दान, गीता/गरुड़ पुराण पाठ।

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विस्तृत उत्तर

पितृपक्ष में शास्त्रों के अनुसार कई कार्य वर्जित माने गए हैं।

पितृपक्ष में न करें

  1. 1नया कार्य शुरू न करें — नया व्यापार, गृहप्रवेश, वाहन खरीद।
  2. 2विवाह/सगाई न करें — मांगलिक कार्य वर्जित।
  3. 3मुंडन/नामकरण जैसे संस्कार न करें।
  4. 4मांसाहार-मदिरा पूर्णतः वर्जित (विशेषतः श्राद्ध के दिन)।
  5. 5प्याज-लहसुन से बचें — सात्विक भोजन करें (Aaj Tak verified)।
  6. 6लोहे के बर्तन में भोजन न बनाएँ/न खाएँ — कांसा/पीतल उत्तम।
  7. 7बाल/नाखून न कटवाएँ (कुछ परंपराओं में)।
  8. 8नए वस्त्र न खरीदें/न पहनें।
  9. 9दान लेना वर्जित (दान देना शुभ)।
  10. 10पितरों का अपमान न करें — बड़ों से अच्छा व्यवहार।

क्या करें

  • नित्य तर्पण (तिल-जल)।
  • सात्विक भोजन।
  • गो-सेवा, ब्राह्मण भोजन, दान।
  • गीता/गरुड़ पुराण पाठ।
  • पीपल को जल चढ़ाएँ।

ध्यान दें: ये पारंपरिक नियम हैं। यदि अत्यंत आवश्यक हो तो विद्वान पंडित से परामर्श लें।

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शास्त्रीय स्रोत
शास्त्र, गरुड़ पुराण (Aaj Tak verified)
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