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श्राद्ध विधि📜 वायु पुराण, गरुड़ पुराण, गया महात्म्य1 मिनट पठन

गया में पिंडदान क्यों जरूरी माना जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

वायु पुराण: गया में पिंडदान = पितरों को सीधा मोक्ष। ब्रह्मा वरदान। गरुड़ पुराण: 7 पीढ़ी मोक्ष। विष्णुपद मंदिर + फल्गु नदी। श्रीराम ने भी दशरथ के लिए गया में पिंडदान किया।

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विस्तृत उत्तर

गया (बिहार) को पितरों के मोक्ष का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है।

क्यों जरूरी

  1. 1वायु पुराण/गया महात्म्य: गयासुर (एक दैत्य) ने कठोर तपस्या की। उसके शरीर पर भगवान विष्णु ने पैर रखा — वह स्थान विष्णुपद कहलाया। ब्रह्मा जी ने वरदान दिया: 'गया में पिंडदान करने से पितर सीधे मोक्ष पाएंगे।'
  1. 1गरुड़ पुराण: गया में एक बार पिंडदान = सात पीढ़ियों के पितरों को मोक्ष।
  1. 1फल्गु नदी — गया की पवित्र नदी। इसके तट पर पिंडदान अत्यंत फलदायक।
  1. 1विष्णुपद मंदिर — भगवान विष्णु के चरण चिह्न। यहाँ पिंडदान = पितर सीधे विष्णुलोक।
  1. 1श्रीराम ने भी गया में पिंडदान किया — अपने पिता दशरथ के लिए (रामायण)।

विशेषता: भारत में अन्य तीर्थों (प्रयागराज, काशी, हरिद्वार) में भी पिंडदान होता है, पर गया को 'पितृ तीर्थ' कहा जाता है — यहाँ का पिंडदान सर्वश्रेष्ठ।

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शास्त्रीय स्रोत
वायु पुराण, गरुड़ पुराण, गया महात्म्य
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