विस्तृत उत्तर
शंकुकर्णेश्वर महादेव पर किए गए अभिषेक और अनुष्ठान की फलश्रुति —
असाध्य रोगमुक्ति एवं चिरायु — शरीर के असाध्य और चिरकालिक रोग नष्ट होते हैं। जातक अकाल मृत्यु से बचकर पूर्ण आयु प्राप्त करता है।
ग्रह-दोष और मारक दशा की शांति — कुंडली में अष्टमेश, मारकेश या क्रूर ग्रहों (शनि, राहु, केतु) की दशा के प्राण-घातक कुप्रभाव क्षीण होते हैं।
पितृ दोष एवं शाप निवारण — रुद्राभिषेक, घट-दान और तर्पण से पितृ दोष और पूर्व जन्मों के शाप समाप्त होते हैं।
संतान और रोजगार — सावन मास या 40 निरंतर सोमवार की उपासना से उत्तम संतान और रोजगार प्राप्ति।
कैवल्य मोक्ष — चूंकि यह काशी के अविमुक्त क्षेत्र में है, यहां साधना करने वाले या प्राण त्यागने वाले जीव को शिव स्वयं दाहिने कान में 'तारक मंत्र' का उपदेश देते हैं — जो जन्म-मरण के चक्र से सदा मुक्त कर देता है।





