विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के काशी खंड का 69वां अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें काशी के 68 अति-मनमोहक और पाप-नाशक शिवलिंगों का वर्णन है जो मोक्षदायिनी शक्ति से परिपूर्ण हैं।
इस अध्याय में देवसेनापति स्कंद (कार्तिकेय) महर्षि अगस्त्य को इन लिंगों का वर्णन सुनाते हैं। नंदीश्वर भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं कि इस क्षेत्र में मणि-रत्नों से सुसज्जित 68 आकर्षक स्थान प्रकट हुए हैं, जहां विभिन्न तीर्थों से आए सिद्ध शिवलिंग स्थापित हैं।
इसी क्रम में कुरुक्षेत्र से स्थाणु लिंग, नैमिषारण्य से देवदेव लिंग, और शंकुकर्णेश्वर महादेव (महातेज लिंग) का वर्णन विभिन्न तीर्थों के प्रतिनिधि के रूप में आता है।
श्लोक 173 में स्पष्ट उद्घोष है — 'यदि इन लिंगों के नाम सुने जाते हैं, तो हजारों जन्मों में उत्पन्न पापों के ढेर नष्ट हो जाते हैं।'





