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शंकुकर्णेश्वर प्रश्नोत्तरी — 9 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित शंकुकर्णेश्वर विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 9 प्रश्न

काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव पर अभिषेक के बाद ताली क्यों बजाते हैं?

अभिषेक के बाद ताली का नाद ध्यानमग्न शिव का ध्यान आकृष्ट करता है। शंकुकर्ण नाम ही ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियां ग्रहण करने से जुड़ा है — इसलिए यहां ताली का नाद विशेष प्रभावी और मंत्रों को बहुगुणित करने वाला।

शंकुकर्णेश्वरतालीअभिषेक
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव की आराधना से क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं?

फल — (1) असाध्य रोगमुक्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा, (2) अष्टमेश-मारकेश ग्रह दशा शांति, (3) पितृ दोष-शाप निवारण, (4) संतान-रोजगार (40 सोमवार), (5) कैवल्य मोक्ष — शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं।

शंकुकर्णेश्वरफलश्रुतिअकाल मृत्यु
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में घट दान का क्या विधान है?

महर्षि व्यास के अनुसार वैशाख पूर्णिमा पर जल-भरा घड़ा ब्राह्मण को दान = गया में 100 बार श्राद्ध का पुण्य। जल-भरा घट प्राणों की पूर्णता का प्रतीक — पितृ-तृप्ति और प्राण-रक्षा दोनों।

घट दानशंकुकर्णेश्वरवैशाख पूर्णिमा
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव के समीप कौन-कौन से मंदिर और देवस्थान हैं?

समीपस्थ — वायव्य में मांडव्येश्वर, उत्तर में सिद्धेश्वर (प्राचीन कुंड पर), निकट द्वारेश्वर-द्वारेश्वरी (सदाशिव-पार्वती), उत्तर में मुख-शिवलिंग व छागलेश्वर, पश्चिम में कपर्दीश्वर व अंगारेश्वर (तड़ाग सहित)।

शंकुकर्णेश्वरमांडव्येश्वरसिद्धेश्वर
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व क्या है?

तीन शक्तियां — काशी क्षेत्र (करोड़ों गुना फल), शिवगण-ऊर्जान्वित लिंग, और प्राण-दिशा (वायव्य कोण)। गुप्त नाद-ऊर्जा मंत्रों को बहुगुणित करती है। अष्टमेश-मारकेश दशा के अरिष्ट योग खंडित होते हैं।

शंकुकर्णेश्वरमहामृत्युंजयअनुष्ठान
काशी के शिवलिंग

काशी खंड अध्याय 69 में शंकुकर्णेश्वर का क्या स्थान है — 68 मोक्षदायी शिवलिंग

काशी खंड अध्याय 69 में 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में शंकुकर्णेश्वर 'महातेज लिंग' के रूप में वर्णित हैं। कुरुक्षेत्र का स्थाणु, नैमिषारण्य का देवदेव लिंग भी इनमें हैं। श्लोक 173 — इनके नाम सुनने मात्र से हजारों जन्मों के पाप नष्ट।

काशी खंडअध्याय 6968 शिवलिंग
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव को 'गुप्त शिवलिंग' क्यों कहते हैं?

दो कारण — (1) ऐतिहासिक: ऐबक, लोदी, औरंगजेब के आक्रमणों से बचाने के लिए छिपाया गया, (2) दार्शनिक: शिव का वास साधक के सूक्ष्म शरीर (लिंग देह) में गुप्त रूप से है — गुप्त शिवलिंग इसी सत्य का प्रतीक।

गुप्त शिवलिंगशंकुकर्णेश्वरकाशी
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव वायव्य कोण में क्यों स्थित हैं — इसका आध्यात्मिक कारण क्या है?

वायव्य कोण के अधिपति वायु देव हैं — वायु प्राण का प्रतीक। प्राण-दिशा में स्थापित होने से यह शिवलिंग प्राणों की रक्षा, आयु-वृद्धि, असाध्य रोग नाश और अकाल मृत्यु रोकने में अमोघ है।

शंकुकर्णेश्वरवायव्य कोणवायु
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव मंदिर काशी में कहाँ स्थित है?

काशी विश्वनाथ (विश्वेश्वर) के वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) में स्थित हैं।

शंकुकर्णेश्वरकाशीवायव्य कोण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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