विस्तृत उत्तर
शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यहां तीन शक्तियां एक साथ मिलती हैं —
पहला — काशी क्षेत्र जहां प्रत्येक अनुष्ठान का फल करोड़ों गुना अधिक होता है।
दूसरा — यह शिवलिंग शिव गणों द्वारा सीधे ऊर्जान्वित किया गया है।
तीसरा — यह प्राण-दिशा (वायव्य कोण) में स्थित है, जो अकाल मृत्यु निवारण से सीधे जुड़ा है।
इस गुप्त शिवलिंग की नाद-ऊर्जा मंत्रों के प्रभाव को बहुगुणित कर देती है। जब चिकित्सा विज्ञान और लौकिक उपाय विफल होने लगते हैं, तब इस शिवलिंग के सान्निध्य में किया गया महामृत्युंजय अनुष्ठान, रुद्राभिषेक और षोडशोपचार पूजन जीव के प्राणों की रक्षा का अंतिम अमोघ कवच सिद्ध होता है।
ज्योतिष के अनुसार जब कुंडली में अष्टमेश, मारकेश या क्रूर ग्रहों की दशा आती है, तब इस शिवलिंग पर अनुष्ठान से वे अरिष्ट योग खंडित होते हैं।





