शिव मंदिरकाशी में मणिकर्णिका घाट पर शिव पूजा का क्या विशेष महत्व है?शिव स्वयं मृतक को तारक मंत्र देते हैं — मोक्ष। अनादि अग्नि कभी नहीं बुझी। पार्वती मणिकुंडल गिरा → नाम। अविमुक्त क्षेत्र — शिव सदा निवास। पितृ तर्पण + शिव पूजा = अत्यंत पुण्य।#काशी#मणिकर्णिका#घाट
शिव धाम महिमाकाशी को शिव की नगरी क्यों कहते हैं शिव पुराण क्या कहता हैशिव पुराण में काशी को 'अविमुक्त क्षेत्र' कहा गया है जिसे शिव कभी नहीं छोड़ते। काशी में मरने पर शिव स्वयं 'तारक मंत्र' देते हैं। काशी शिव के त्रिशूल पर स्थित और प्रलयकाल में भी अविनाशी है।
स्तोत्रकालभैरव अष्टकम का पाठ कब करना चाहिए?शंकराचार्य रचित। कब: कालाष्टमी (कृष्ण अष्टमी), भैरवाष्टमी (मार्गशीर्ष), शनिवार/मंगलवार, रात्रि। उद्देश्य: भय नाश (काल=मृत्यु भय), शत्रु नाश, समय अधिपति, काशी मोक्ष। बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते।#कालभैरव#अष्टकम#शंकराचार्य
शिव अवतारभैरव अवतार में शिव ने क्या किया?भैरव अवतार में शिव ने ब्रह्मा का अहंकारी पाँचवाँ सिर काटा, काशी का आधिपत्य लिया और ब्रह्म-हत्या के प्रायश्चित के लिए तीर्थाटन किया। काशी में उन्हें पाप-मुक्ति मिली और वे वहाँ के कोतवाल बने।#भैरव#ब्रह्मा सिर#काशी
शिव लीलागजासुर कौन था?गजासुर महिषासुर का पुत्र और हाथी जैसे रूप का शक्तिशाली दैत्य था। उसने ब्रह्मा की तपस्या से वरदान प्राप्त किया और तीनों लोकों में आतंक मचाया। वह शिव भक्त भी था और अंत में काशी में कृत्तिवासेश्वर ज्योतिर्लिंग बन गया।#गजासुर#महिषासुर पुत्र#हाथी दैत्य
शिव अवतारभैरव अवतार क्यों हुआ था?भैरव अवतार ब्रह्मा जी के अहंकार के कारण हुआ। ब्रह्मा ने शिव के विषय में अपमानजनक वचन कहे, जिससे शिव क्रोधित हुए और उनकी भृकुटि से काल भैरव प्रकट हुए। भैरव ने ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काटकर अहंकार का नाश किया।#भैरव अवतार#काल भैरव#ब्रह्मा अहंकार
मोक्ष मार्गकाशी में मरने से मोक्ष मिलता है क्या — सच?शास्त्र (काशी खंड): हाँ — शिव तारक मंत्र सुनाते हैं। मणिकर्णिका = मोक्ष। पर कबीर: 'बिना ज्ञान मोक्ष नहीं।' गीता: कर्म+ज्ञान+भक्ति = मोक्ष, स्थान नहीं। काशी सहायक, एकमात्र कारण नहीं।#काशी#मोक्ष#वाराणसी
वाराणसी और पार्वती प्रश्नकाशी को अविमुक्त क्षेत्र क्यों कहा गया है?वाराणसीपुरी को अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है, जहाँ शिव और रुद्राणी का संवाद बताया गया है।#काशी#वाराणसी#अविमुक्त क्षेत्र
श्रीमद्भागवतभागवत कथा तीर्थों से श्रेष्ठ क्यों है?कहा गया है कि गंगा, गया, काशी, पुष्कर और प्रयाग भी फल की दृष्टि से भागवत कथा की बराबरी नहीं कर सकते।#भागवत कथा#तीर्थ#गंगा
प्रमुख मंदिरवाराणसी को माँ शैलपुत्री का स्थायी लोक क्यों माना जाता है?वाराणसी = माँ शैलपुत्री का स्थायी लोक क्यों: जन्म के बाद पहली बार देवी काशी आईं और यहीं स्वयं विराजमान हो गईं। इसलिए वाराणसी = उनका स्थायी लोक। नवरात्रि में विशेष पूजा।#वाराणसी स्थायी लोक#काशी#देवी प्रथम आगमन
प्रमुख मंदिरमाँ ब्रह्मचारिणी का प्रमुख मंदिर कहाँ है?माँ ब्रह्मचारिणी का प्रमुख मंदिर: वाराणसी (काशी) के बलाजी घाट पर स्थित ब्रह्मचारिणी देवी मंदिर। नवरात्रि के दूसरे दिन भक्तों की भीड़ + विशेष पूजा-अर्चना।#ब्रह्मचारिणी मंदिर#वाराणसी#बलाजी घाट
तीर्थ स्थानकाशी में कालसर्प पूजा का क्या महत्व है?काशी महा-श्मशान है जहाँ मृत्यु पर विजय (मोक्ष) मिलती है — कालसर्प योग का सबसे बड़ा लक्षण मृत्यु-भय है इसलिए काशी में पूजा अत्यंत प्रभावी है।#काशी#वाराणसी#महाश्मशान
तीर्थ स्थानकालसर्प दोष शांति के लिए कौन से तीर्थ जाएं?कालसर्प दोष शांति के लिए तीन प्रमुख तीर्थ हैं: त्र्यंबकेश्वर (नासिक), उज्जैन (महाकाल नगरी) और काशी (वाराणसी)।#तीर्थ#त्र्यंबकेश्वर#उज्जैन
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस की रचना कहाँ शुरू हुई?अयोध्या में — 'अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।' कुछ भाग काशी में भी लिखा। अन्त में काशी में भगवान विश्वनाथ के समक्ष समर्पित।#बालकाण्ड#रचना स्थान#अयोध्या
पौराणिक कथाकालभैरव पर लगा 'ब्रह्महत्या' का पाप कैसे दूर हुआ?ब्रह्मा जी का सिर काटने के कारण कालभैरव पर ब्रह्महत्या का पाप लगा था। जब वे भिक्षाटन करते हुए काशी (वाराणसी) पहुंचे, तब वहां की पवित्र भूमि पर पैर रखते ही वे इस पाप से मुक्त हुए।#ब्रह्महत्या#कपालमोचन#काशी
काशी के शिवलिंगकाशी में महाकालेश्वर शिवलिंग कहाँ स्थित है और इसकी स्थापना किसने की?यह काशी के दारा नगर में महामृत्युंजय महादेव मंदिर प्रांगण में स्थित है। इसकी स्थापना शिव के परम गण 'महाकाल' ने की थी, जिसका वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड में है।#महाकालेश्वर शिवलिंग#काशी#दारा नगर
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व क्या है?तीन शक्तियां — काशी क्षेत्र (करोड़ों गुना फल), शिवगण-ऊर्जान्वित लिंग, और प्राण-दिशा (वायव्य कोण)। गुप्त नाद-ऊर्जा मंत्रों को बहुगुणित करती है। अष्टमेश-मारकेश दशा के अरिष्ट योग खंडित होते हैं।#शंकुकर्णेश्वर#महामृत्युंजय#अनुष्ठान
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव को 'गुप्त शिवलिंग' क्यों कहते हैं?दो कारण — (1) ऐतिहासिक: ऐबक, लोदी, औरंगजेब के आक्रमणों से बचाने के लिए छिपाया गया, (2) दार्शनिक: शिव का वास साधक के सूक्ष्म शरीर (लिंग देह) में गुप्त रूप से है — गुप्त शिवलिंग इसी सत्य का प्रतीक।#गुप्त शिवलिंग#शंकुकर्णेश्वर#काशी
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव मंदिर काशी में कहाँ स्थित है?काशी विश्वनाथ (विश्वेश्वर) के वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) में स्थित हैं।#शंकुकर्णेश्वर#काशी#वायव्य कोण
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव कौन हैं और इनकी स्थापना किसने की?शंकुकर्णेश्वर महादेव काशी का गुप्त शिवलिंग है, जिसे शिवगण 'शंकुकर्ण' ने स्थापित किया। काशी खंड अध्याय 69 में इसे काशी के 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में गिना गया है।#शंकुकर्णेश्वर महादेव#काशी#शिवगण
काशी के शिवलिंगशिवगण-स्थापित लिंग क्या होता है — इसकी विशेषता क्या है?शिवगण शिव की ऊर्जा के विस्तारित स्वरूप हैं। उनके स्थापित लिंग में उस गण की विशिष्ट शक्ति समाहित होती है (जैसे घंटाकर्णेश्वर में नाद-शक्ति)। गण आज भी सूक्ष्म रूप में काशी में विद्यमान और लिंग की उपासनारत हैं।#शिवगण#शिवलिंग#शिव ऊर्जा
काशी के शिवलिंगकाशी में कुल कितने शिवलिंग हैं और कौन-कौन ने स्थापित किए?काशी में ५११+ शिवलिंग — १२ स्वयंभू, ४६ देवताओं द्वारा, ४७ ऋषियों द्वारा, ४० शिवगणों द्वारा, २९४ शिवभक्तों द्वारा स्थापित। काशी तांत्रिक दृष्टि से एक 'महा-यंत्र' है। वर्तमान में ~३२४ शिवलिंग अस्तित्व में।#काशी#शिवलिंग#511
श्राद्ध एवं पितरघंटाकर्ण हृद में पितृ तर्पण का क्या महत्त्व है?स्कंद पुराण के अनुसार इस तीर्थ पर श्राद्ध करने से सात पीढ़ियों के नरकवासी पूर्वजों का उद्धार होता है। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई वंशज इस जल से तिलांजलि दे। अन्न-दान और औषधि-दान विशेष पुण्यदायी।#पितृ तर्पण#घंटाकर्ण हृद#श्राद्ध
पौराणिक कथाएँराजा दिवोदास के कारण शिव ने काशी क्यों छोड़ी थी?दिवोदास के राजकाल में शिव मंदराचल गए। काशी की स्थिति जानने को योगिनियाँ, सूर्य, ब्रह्मा भेजे — सब काशी की माया में मुग्ध होकर लौटे नहीं। फिर घंटाकर्ण-महोदर को भेजा — वे भी मोहित होकर रुक गए और शिवलिंग स्थापित कर दिए।#दिवोदास#काशी#शिव
काशी के शिवलिंगकाशी में शिवगणों द्वारा स्थापित शिवलिंगों की सूचीकाशी खंड के अनुसार — दंडपाणि ने दंडीश्वर, घंटाकर्ण ने घंटाकर्णेश्वर, वीरभद्र ने वीरभद्रेश्वर, कुण्डोदर ने कुण्डोदरेश्वर, महाकाल ने महाकालेश्वर, क्षेमक ने क्षेमेश्वर, पंचशीर्ष ने पंचशिखेश्वर की स्थापना की।#शिवगण#काशी#शिवलिंग
काशी के शिवलिंगघंटाकर्णेश्वर महादेव मंदिर कहाँ है — काशी में सटीक स्थानवाराणसी के कर्णघंटा मोहल्ले (K 60/66) में — चौक और मैदागिन के बीच। समीप ही घंटाकर्ण हृद (कर्णघंटा तालाब — K 60/67) और व्यासेश्वर महादेव का मंदिर भी है।#घंटाकर्णेश्वर महादेव#काशी#वाराणसी
तीर्थ एवं मोक्षगंगातट पर मृत्यु से मोक्ष का विधान क्या है?गंगातट, विशेषकर काशी-वाराणसी में, मृत्यु होने पर स्वयं शिव तारक मंत्र देते हैं जिससे मोक्ष मिलता है — यह काशीखण्ड में वर्णित है। गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल पड़ने से आत्मा शुद्ध होती है और पाप नष्ट होते हैं।#गंगातट#मृत्यु#मोक्ष
तीर्थ एवं धामकाशी में मरने पर मोक्ष क्यों मिलता है?काशी में शिव स्वयं मरने वाले के कान में तारक मंत्र देते हैं जिससे पापी भी मोक्ष पाता है। काशी शिव का अविमुक्त क्षेत्र है जिसे वे कभी नहीं छोड़ते। मणिकर्णिका घाट पर दाह-संस्कार से आत्मा सीधे मोक्ष पाती है।#काशी#मोक्ष#तारक मंत्र
तीर्थ एवं धामकाशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का रहस्य क्या है?काशी विश्वनाथ का सबसे बड़ा रहस्य तारक मंत्र है — यहाँ मरने वाले के कान में स्वयं शिव मुक्तिदायक मंत्र का उपदेश करते हैं, इसीलिए काशी मोक्ष नगरी है। काशी शिव के त्रिशूल पर बसी है इसलिए प्रलय में भी नष्ट नहीं होती।#काशी#विश्वनाथ#ज्योतिर्लिंग
तीर्थ यात्राकाशी मणिकर्णिका दाह संस्कार विशेष पुण्यकाशी सबसे पवित्र श्मशान; 24×7 अग्नि (हजारों वर्ष)। शिव तारक मंत्र=मोक्ष। पार्वती मणिकर्ण कथा। फोटो सख्त वर्जित। डोम राजा।#मणिकर्णिका#काशी#दाह
तीर्थ यात्राकाशी काल भैरव दर्शन क्यों जरूरीकाशी कोतवाल; बिना दर्शन काशी अपूर्ण। पाप न्यायाधीश। मदिरा अर्पित (अनूठी परंपरा — मूर्ति होंठ पर गायब)। कुत्ता = भैरव वाहन। विश्वनाथ से ~1km।#काल भैरव#काशी#दर्शन
तीर्थ यात्राकाशी अन्नपूर्णा मंदिर दर्शन विधानविश्वनाथ निकट; पार्वती अन्न देवी रूप। शिव भिक्षा कथा। गंगा→विश्वनाथ→अन्नपूर्णा = काशी विधि। अन्नदान = काशी सबसे पुण्यदायक।#काशी#अन्नपूर्णा#दर्शन
तीर्थ यात्राकाशी संकट मोचन मंदिर विशेष महत्वतुलसीदास स्थापित; यहां हनुमान दर्शन+अष्टक रचा। लड्डू प्रसाद। संकट मुक्ति। मंगलवार/शनिवार विशेष। काशी: विश्वनाथ→भैरव→संकट मोचन। संगीत समारोह प्रसिद्ध।#संकट मोचन#काशी#हनुमान
तीर्थ यात्राकाशी विश्वनाथ दर्शन नियम विधि2:30AM-11PM। ऑनलाइन+आधार। गंगा स्नान→विश्वनाथ→गंगा आरती। काशी कॉरिडोर।#काशी#विश्वनाथ#दर्शन
अन्त्येष्टि संस्कारगंगा में अस्थि विसर्जन का क्या विशेष महत्व है?गंगा अस्थि: मोक्षदायिनी (गरुड़ पुराण), विष्णु पादोदक (चरण स्पर्श), पापनाश, पुनर्जन्म मुक्ति। स्थान: हरिद्वार, प्रयागराज, काशी (शिव तारक मंत्र), गंगासागर। 3-10 दिन में। 'ॐ' सहित विसर्जन→तर्पण→पिण्डदान।#अस्थि विसर्जन#गंगा#मोक्ष
पर्वदेव दीपावली पर काशी में दीपदान का क्या विधान हैकाशी देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा। प्रातः गंगा स्नान → शिव पूजा (त्रिपुरारि) → सन्ध्या में 84 घाटों पर लाखों दीये → दशाश्वमेध घाट महा गंगा आरती → गंगा में दीये प्रवाहित → रात्रि जागरण। स्कन्द पुराण: दीपदान = सर्वपापनाश। शिव का त्रिपुरासुर वध उपलक्ष्य।#देव दीपावली#काशी#दीपदान
पर्वदेव दीपावली कब मनाते हैं और कैसेदेव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा — देवताओं की दीपावली। शिव का त्रिपुरासुर वध। गंगा स्नान → शिव-विष्णु पूजा → सन्ध्या में लाखों दीये (नदी तट, घाट, मन्दिर)। काशी में 84 घाटों पर दीपदान + भव्य गंगा आरती। सर्वपापनाश, मोक्ष।#देव दीपावली#कार्तिक पूर्णिमा#काशी
शिव पूजाशिव पूजा से मोक्ष कैसे प्राप्त होता है?शिव पूजा से मोक्ष: शिव पुराण (कैलाश संहिता): 'शिवमेव परो मोक्षः।' तीन मार्ग: सायुज्य-मुक्ति (लिंग पुराण), काशी में मोक्ष (स्कंद पुराण: शिव तारक-मंत्र देते हैं), महाशिवरात्रि व्रत। क्रम: पाप-क्षय → वासना-नाश → अविद्या-नाश → समाधि → शिव-सायुज्य। ज्ञान + वैराग्य + भक्ति आवश्यक।#शिव पूजा#मोक्ष#मुक्ति
देवी पूजाअन्नपूर्णा देवी की पूजा से अन्न की कमी कैसे दूर होती है?अन्नपूर्णा = पार्वती रूप, सृष्टि को अन्न देने वाली। शिव पुराण: शिव को भी भिक्षा मांगनी पड़ी। तैत्तिरीय उपनिषद: 'अन्नं ब्रह्म'। मंत्र: 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' (शंकराचार्य)। अन्न भोग, अन्न दान सर्वश्रेष्ठ पूजा। शुक्रवार/पूर्णिमा विशेष। काशी अन्नपूर्णा मंदिर प्रसिद्ध।#अन्नपूर्णा#अन्न#काशी
शिव महिमाब्रह्माजी का सिर काटने के बाद शिव को ब्रह्महत्या का पाप क्यों लगा?ब्रह्मा के सिर की हत्या महापाप (ब्रह्महत्या) है इसलिए भैरव रूप में शिव को यह दोष लगा। भैरव कपाल हाथ में लेकर तीर्थाटन करते रहे। काशी पहुँचने पर कपाल गिरा और पाप-मुक्ति हुई — वह स्थान 'कपाल मोचन' कहलाया।#ब्रह्महत्या#काल भैरव#कपाल मोचन