ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
अन्त्येष्टि संस्कार📜 गरुड़ पुराण, स्कन्द पुराण, पद्म पुराण2 मिनट पठन

गंगा में अस्थि विसर्जन का क्या विशेष महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

गंगा अस्थि: मोक्षदायिनी (गरुड़ पुराण), विष्णु पादोदक (चरण स्पर्श), पापनाश, पुनर्जन्म मुक्ति। स्थान: हरिद्वार, प्रयागराज, काशी (शिव तारक मंत्र), गंगासागर। 3-10 दिन में। 'ॐ' सहित विसर्जन→तर्पण→पिण्डदान।

📖

विस्तृत उत्तर

गंगा में अस्थि (हड्डियाँ/राख) विसर्जन हिन्दू धर्म में मोक्ष प्रदायिनी क्रिया मानी गई है:

  1. 1गंगा = मोक्षदायिनी: गरुड़ पुराण: 'गंगायां यस्य अस्थीनि तिष्ठन्ति...' — जिसकी अस्थियाँ गंगा में हैं, वह मोक्ष प्राप्त करता है। गंगाजल = पापनाशिनी — अस्थि गंगा स्पर्श = मृतक के सम्पूर्ण पापों का क्षय।
  1. 1विष्णु पद से उत्पन्न: गंगा = विष्णु पादोदक (विष्णु के चरणों से)। अस्थि गंगा में = विष्णु चरण स्पर्श = परम पवित्र।
  1. 1पुनर्जन्म चक्र मुक्ति: मान्यता: गंगा में अस्थि विसर्जन से मृतक को सद्गति (उत्तम लोक/मोक्ष) प्राप्त होती है — पुनर्जन्म चक्र से मुक्ति।
  1. 1स्कन्द पुराण: 'गंगा गंगेति यो ब्रूयात् योजनानां शतैरपि। मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति।' — दूर से भी 'गंगा-गंगा' कहने से पाप नष्ट। तो अस्थि गंगा में = असीम पुण्य।

प्रमुख स्थान: हरिद्वार (हर की पैड़ी), प्रयागराज (त्रिवेणी संगम), काशी (मणिकर्णिका/दशाश्वमेध), गंगासागर। काशी में अस्थि विसर्जन = शिव कान में तारक मंत्र = मोक्ष।

विधि: अस्थि (दाह संस्कार तीसरे दिन एकत्रित) → शुद्ध कपड़े में लपेटें → गंगा तट → स्नान → 'ॐ' सहित गंगा में विसर्जित → तर्पण → पिण्डदान → ब्राह्मण दान।

समय: मृत्यु के 3-10 दिन में। यदि शीघ्र सम्भव न हो = पितृपक्ष/मकर संक्रांति/कुम्भ पर।

📜
शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, स्कन्द पुराण, पद्म पुराण
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

अस्थि विसर्जनगंगामोक्षहरिद्वारकाशी

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

गंगा में अस्थि विसर्जन का क्या विशेष महत्व है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको अन्त्येष्टि संस्कार से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर गरुड़ पुराण, स्कन्द पुराण, पद्म पुराण पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।