ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 हरिद्वार तीर्थ परंपरा1 मिनट पठन

हरिद्वार में अस्थि विसर्जन कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

हर की पैड़ी/गंगा घाट → पंडा से संपर्क → गंगा स्नान → मंत्रोच्चार → तिल-जल तर्पण → अस्थि गंगा में → पिंडदान → दान। पंडा कुल रजिस्टर रखता है। विश्वसनीय पंडा चुनें; पर्यावरण अनुकूल विसर्जन।

📖

विस्तृत उत्तर

हरिद्वार = गंगा का मैदानी क्षेत्र प्रवेश; अस्थि विसर्जन का प्रमुख तीर्थ।

विधि

  1. 1हर की पैड़ी या अन्य गंगा घाट पर जाएं।
  2. 2पंडा/पुरोहित — हरिद्वार के स्थानीय पंडा (कुल पुजारी) से संपर्क। अनेक परिवारों के पीढ़ियों के रिकॉर्ड इनके पास।
  3. 3विधि:
  • स्नान (गंगा स्नान)।
  • पंडित के मार्गदर्शन में मंत्रोच्चार।
  • तिल-जल तर्पण।
  • अस्थि गंगा में विसर्जन (बहते पानी में)।
  • पिंडदान (यदि करना हो)।
  • दान — वस्त्र, अन्न, धन पंडित/गरीबों को।
  1. 1कुल रजिस्टर — पंडा अपनी पोथी (register) में परिवार का रिकॉर्ड दर्ज करता है।

सावधानी: विश्वसनीय पंडा चुनें। अत्यधिक दक्षिणा दबाव न स्वीकारें। सरकारी निर्धारित दरें पूछें।

आधुनिक: हरिद्वार प्रशासन ने प्लास्टिक/पॉलिथीन में अस्थि विसर्जन पर रोक लगाई है — कपड़े/प्राकृतिक सामग्री प्रयोग करें।

📜
शास्त्रीय स्रोत
हरिद्वार तीर्थ परंपरा
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

हरिद्वारअस्थि विसर्जनगंगाविधि

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

हरिद्वार में अस्थि विसर्जन कैसे करें — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको श्राद्ध एवं पितृ कर्म से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर हरिद्वार तीर्थ परंपरा पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।