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श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 गरुड़ पुराण, अंत्येष्टि पद्धति1 मिनट पठन

दसवां कर्म कैसे करें विधि क्या है

संक्षिप्त उत्तर

दसवां: स्नान → दशगात्र पिंडदान (प्रेत शरीर 10 अंग — गरुड़ पुराण) → तिल-जल → दान (वस्त्र/अन्न) → ब्राह्मण भोज → मुंडन (कुछ परंपरा)। 11वें: एकोद्दिष्ट; 12वें: सपिंडीकरण; 13वें: शुद्धि। कुल पुरोहित अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

दसवां (दशाह) = मृत्यु के 10वें दिन का कर्म — सूतक/अशौच में महत्वपूर्ण पड़ाव।

विधि (सामान्य)

  1. 1स्नान — सभी परिजन।
  2. 2दशगात्र पिंडदान — 10 दिन, 10 पिंड = प्रेत शरीर के 10 अंग निर्माण (गरुड़ पुराण)। 10वें दिन अंतिम पिंड।
  3. 3तिल-जल तर्पण — मृतक को तिल-जल अर्पित।
  4. 4दान — वस्त्र, बर्तन, अन्न — मृतक नाम से।
  5. 5ब्राह्मण भोज — 1-5 ब्राह्मणों को भोजन + दक्षिणा।
  6. 6बालों का मुंडन — कुछ परंपराओं में 10वें दिन (कुछ में 13वें)।

10वें दिन बाद

  • 11वें दिन: एकोद्दिष्ट श्राद्ध।
  • 12वें दिन: सपिंडीकरण श्राद्ध (प्रेत → पितर)।
  • 13वें दिन: तेरहवीं/शुद्धि (प्रश्न 520)।

ध्यान दें: 10वें दिन की विधि क्षेत्र/कुल अनुसार अत्यंत भिन्न। कुल पुरोहित से अवश्य कराएं।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, अंत्येष्टि पद्धति
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