विस्तृत उत्तर
दसवां (दशाह) = मृत्यु के 10वें दिन का कर्म — सूतक/अशौच में महत्वपूर्ण पड़ाव।
विधि (सामान्य)
- 1स्नान — सभी परिजन।
- 2दशगात्र पिंडदान — 10 दिन, 10 पिंड = प्रेत शरीर के 10 अंग निर्माण (गरुड़ पुराण)। 10वें दिन अंतिम पिंड।
- 3तिल-जल तर्पण — मृतक को तिल-जल अर्पित।
- 4दान — वस्त्र, बर्तन, अन्न — मृतक नाम से।
- 5ब्राह्मण भोज — 1-5 ब्राह्मणों को भोजन + दक्षिणा।
- 6बालों का मुंडन — कुछ परंपराओं में 10वें दिन (कुछ में 13वें)।
10वें दिन बाद
- ▸11वें दिन: एकोद्दिष्ट श्राद्ध।
- ▸12वें दिन: सपिंडीकरण श्राद्ध (प्रेत → पितर)।
- ▸13वें दिन: तेरहवीं/शुद्धि (प्रश्न 520)।
ध्यान दें: 10वें दिन की विधि क्षेत्र/कुल अनुसार अत्यंत भिन्न। कुल पुरोहित से अवश्य कराएं।





