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श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु1 मिनट पठन

उत्तर क्रिया में कौन कौन से कर्म होते हैं

संक्षिप्त उत्तर

क्रम: दाह → 3रा (अस्थि) → 1-10 (पिंडदान) → 10वां (दशाह) → 11वां (एकोद्दिष्ट) → 12वां (सपिंडीकरण) → 13वां (शुद्धि) → विसर्जन → मासिक श्राद्ध → वार्षिक। कुल पुरोहित से कराएं।

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विस्तृत उत्तर

उत्तर क्रिया = मृत्यु के बाद 13 दिन (या वर्ष भर) के समस्त कर्म।

क्रम

  1. 1मृत्यु दिवस — स्नान, कफन, अंतिम यात्रा (शव यात्रा)।
  2. 2दाह संस्कार — मुखाग्नि, कपाल क्रिया, अग्नि।
  3. 33रा दिन — अस्थि संग्रह (फूल चुनना)।
  4. 41-10 दिन — दशगात्र पिंडदान (प्रतिदिन 1 पिंड = प्रेत शरीर निर्माण)।
  5. 510वां दिन — दशाह कर्म (प्रश्न 570)।
  6. 611वां दिन — एकोद्दिष्ट श्राद्ध।
  7. 712वां दिन — सपिंडीकरण (प्रेत → पितर रूपांतरण)।
  8. 813वां दिन — तेरहवीं/शुद्धि (प्रश्न 520)।
  9. 9अस्थि विसर्जन — 10 दिन भीतर (प्रश्न 519/572)।
  10. 1016 मासिक श्राद्ध — वास्तव में 12 मासिक + सपिंडीकरण + अन्य।
  11. 11वार्षिक श्राद्ध — प्रतिवर्ष मृत्यु तिथि (प्रश्न 524)।

स्पष्टीकरण: विस्तृत विधि कुल पुरोहित से। आधुनिक: अनेक लोग 10-13 दिन के कर्म एक साथ करते हैं — शास्त्रीय दृष्टि से क्रमानुसार उत्तम।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु
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