विस्तृत उत्तर
पितृपक्ष (भाद्रपद कृष्ण — 15 दिन) में शुभ कार्य वर्जित — कारण:
- 1पितरों का पक्ष — ये 15 दिन पितरों की तृप्ति/श्राद्ध को समर्पित। उत्सव/शुभ कार्य = अनादर।
- 2अशुभ काल — ज्योतिष में पितृपक्ष = अशुभ। नए कार्य = बाधा/असफलता (मान्यता)।
- 3कृष्ण पक्ष — घटता चंद्र = ह्रास; शुभ कार्य = शुक्ल (बढ़ता) में।
- 4सामाजिक — श्रद्धा + शोक काल; उत्सव = अनुचित।
वर्जित: विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया व्यापार, नई खरीदारी, यात्रा आरंभ (कुछ में)।
अनुमत: दैनिक कर्म, आवश्यक कार्य, चिकित्सा, शिक्षा। नौकरी/काम = सामान्य।
स्पष्टीकरण: शुभ कार्य वर्जना = ज्योतिष + लोक परंपरा। वैदिक ग्रंथों में स्पष्ट निषेध सीमित। आवश्यकता > परंपरा।



