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श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 लोक परंपरा, ज्योतिष मान्यता1 मिनट पठन

पितृपक्ष में नए कपड़े खरीदना शुभ है या अशुभ

संक्षिप्त उत्तर

पितृपक्ष में नई खरीदारी = अशुभ (लोक मान्यता)। कपड़े, आभूषण, शुभ कार्य वर्जित। कारण: पितर श्रद्धा काल, उत्सव नहीं। शास्त्रीय स्पष्ट निषेध नहीं — लोक परंपरा। अत्यावश्यक = खरीद सकते।

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विस्तृत उत्तर

पितृपक्ष (भाद्रपद कृष्ण पक्ष — 15 दिन) में नई खरीदारी अशुभ मानी जाती है।

वर्जित (लोक मान्यता)

  • नए कपड़े, आभूषण, वाहन, संपत्ति खरीदना।
  • शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन)।
  • नई शुरुआत (व्यापार, नौकरी — कुछ में)।

कारण: पितृपक्ष = पितरों का पक्ष; उनकी तृप्ति/श्राद्ध का समय। नई खरीदारी = उत्सवी भाव; पितृपक्ष = शोक/श्रद्धा। दोनों विपरीत।

शास्त्रीय आधार: वैदिक/पौराणिक ग्रंथों में स्पष्ट नई खरीदारी निषेध का उल्लेख नहीं। यह मुख्यतः लोक परंपरा और ज्योतिषीय मान्यता है।

व्यावहारिक: आवश्यकता (दवाई, अत्यावश्यक) हो तो खरीद सकते हैं। लोक मान्यता का सम्मान + व्यावहारिकता = संतुलन।

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शास्त्रीय स्रोत
लोक परंपरा, ज्योतिष मान्यता
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