विस्तृत उत्तर
पितृपक्ष (भाद्रपद कृष्ण पक्ष — 15 दिन) में नई खरीदारी अशुभ मानी जाती है।
वर्जित (लोक मान्यता)
- ▸नए कपड़े, आभूषण, वाहन, संपत्ति खरीदना।
- ▸शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन)।
- ▸नई शुरुआत (व्यापार, नौकरी — कुछ में)।
कारण: पितृपक्ष = पितरों का पक्ष; उनकी तृप्ति/श्राद्ध का समय। नई खरीदारी = उत्सवी भाव; पितृपक्ष = शोक/श्रद्धा। दोनों विपरीत।
शास्त्रीय आधार: वैदिक/पौराणिक ग्रंथों में स्पष्ट नई खरीदारी निषेध का उल्लेख नहीं। यह मुख्यतः लोक परंपरा और ज्योतिषीय मान्यता है।
व्यावहारिक: आवश्यकता (दवाई, अत्यावश्यक) हो तो खरीद सकते हैं। लोक मान्यता का सम्मान + व्यावहारिकता = संतुलन।