विस्तृत उत्तर
पितृपक्ष में कुत्ते को भोजन देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
कारण
- 1यमराज के दूत — कुत्ते यमराज के दूत/सेवक माने जाते हैं। कुत्ते को भोजन = यमराज प्रसन्न = पितरों की यमलोक यात्रा सुगम।
- 2श्वान (कुत्ता) = यम के वाहन — कुछ परंपराओं में कुत्ता यम का वाहन; कुछ में द्वारपाल।
- 3भैरव वाहन — काल भैरव (शिव रूप) का वाहन = कुत्ता। भैरव प्रसन्नता।
- 4दया/करुणा — प्राणी सेवा = पुण्य। गरीब/असहाय प्राणी को भोजन = सर्वोच्च दान।
विधि: पितृपक्ष में प्रतिदिन (या कम से कम अमावस्या को) रोटी/भोजन कुत्ते को खिलाएं। श्राद्ध भोजन से पहले कुत्ते का हिस्सा निकालें।
अन्य प्राणी जिन्हें खिलाएं
- ▸कौआ — पितरों का दूत (सर्वसम्मत)।
- ▸गाय — गो माता।
- ▸चींटी — सबसे छोटा प्राणी; दया।
स्पष्टीकरण: कुत्ता = यम दूत — यह पौराणिक मान्यता है (गरुड़ पुराण/महाभारत — युधिष्ठिर का कुत्ता)। श्राद्ध में कौवा + कुत्ता + गाय = तीनों को भोजन — यह सर्वमान्य।




