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श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 धर्मसिंधु, गरुड़ पुराण1 मिनट पठन

अमावस्या श्राद्ध का विशेष महत्व

संक्षिप्त उत्तर

अमावस्या = पितर सबसे निकट; तर्पण सबसे प्रभावी। तिथि अज्ञात = अमावस्या पर। वर्ष 12 अमावस्या = 12 अवसर। तिल-जल + भोज + दान।

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विस्तृत उत्तर

अमावस्या = चंद्रमा अदृश्य; पितरों का सबसे प्रभावी दिवस।

महत्व

  1. 1पितर निकटतम — अमावस्या पर पितर पृथ्वीलोक के सबसे निकट माने जाते हैं।
  2. 2तर्पण सर्वाधिक प्रभावी — अमावस्या का तिल-जल = सबसे अधिक पुण्यफल।
  3. 3सर्वपितृ — यदि मृत्यु तिथि अज्ञात = अमावस्या = सभी पितरों का श्राद्ध (प्रश्न 568)।
  4. 4प्रत्येक माह — वर्ष में 12 अमावस्या = 12 श्राद्ध अवसर। कम से कम पितृपक्ष अमावस्या अवश्य।

विधि: तिल-जल तर्पण (दक्षिण) + ब्राह्मण/गरीब भोज + कौवा/कुत्ता/गाय भोजन + दान।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिंधु, गरुड़ पुराण
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