विस्तृत उत्तर
प्रश्न 518 (दाह संस्कार) जैसा ही — श्राद्ध में बेटी का अधिकार:
परंपरागत: पुत्र/पौत्र = प्राथमिकता। बेटी = पुरुष न हों तो।
शास्त्रीय तथ्य: गरुड़ पुराण में बेटी को श्राद्ध से वर्जित नहीं किया गया — केवल प्राथमिकता क्रम है।
आधुनिक: अनेक प्रगतिशील परिवारों में बेटियां श्राद्ध/तर्पण/पिंडदान करती हैं। कानूनी: बेटी = बेटा (उत्तराधिकार)।
व्यावहारिक: यदि पुत्र नहीं → बेटी पूर्ण अधिकार से श्राद्ध कर सकती है। यदि पुत्र है पर अनुपस्थित/असमर्थ → बेटी कर सकती है। कुल पुरोहित से परामर्श।
सार: बेटी = श्राद्ध अधिकार (शर्त: पुरुष अनुपस्थित — परंपरागत; बिना शर्त — आधुनिक)।




