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श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 गरुड़ पुराण, आधुनिक व्याख्या1 मिनट पठन

श्राद्ध कर्म में बेटी का क्या अधिकार

संक्षिप्त उत्तर

परंपरागत: पुत्र प्राथमिक; बेटी = पुरुष न हों तो। शास्त्र: वर्जित नहीं, प्राथमिकता। आधुनिक: बेटी = पूर्ण अधिकार (बढ़ती स्वीकार्यता)। पुत्र नहीं/अनुपस्थित → बेटी अवश्य करे।

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विस्तृत उत्तर

प्रश्न 518 (दाह संस्कार) जैसा ही — श्राद्ध में बेटी का अधिकार:

परंपरागत: पुत्र/पौत्र = प्राथमिकता। बेटी = पुरुष न हों तो।

शास्त्रीय तथ्य: गरुड़ पुराण में बेटी को श्राद्ध से वर्जित नहीं किया गया — केवल प्राथमिकता क्रम है।

आधुनिक: अनेक प्रगतिशील परिवारों में बेटियां श्राद्ध/तर्पण/पिंडदान करती हैं। कानूनी: बेटी = बेटा (उत्तराधिकार)।

व्यावहारिक: यदि पुत्र नहीं → बेटी पूर्ण अधिकार से श्राद्ध कर सकती है। यदि पुत्र है पर अनुपस्थित/असमर्थ → बेटी कर सकती है। कुल पुरोहित से परामर्श।

सार: बेटी = श्राद्ध अधिकार (शर्त: पुरुष अनुपस्थित — परंपरागत; बिना शर्त — आधुनिक)।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, आधुनिक व्याख्या
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