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श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 धर्मसिंधु, गरुड़ पुराण, श्राद्ध पद्धति1 मिनट पठन

श्राद्ध करने का समय दोपहर में या शाम को

संक्षिप्त उत्तर

कुतप काल (दोपहर ~11:36-12:24) = सर्वोत्तम। अपराह्ण (दोपहर-सूर्यास्त) = स्वीकार्य। प्रातः/रात = वर्जित। पितरों का समय = दोपहर/अपराह्ण। व्यावहारिक: 11-2 बजे।

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विस्तृत उत्तर

श्राद्ध करने का शास्त्रीय समय कुतप काल (दोपहर) है — शाम को नहीं।

शास्त्रीय समय

  1. 1कुतप काल — दिन का 8वां मुहूर्त (लगभग दोपहर 11:36 से 12:24 — स्थान/ऋतु अनुसार भिन्न)। यह श्राद्ध का सर्वोत्तम समय।
  2. 2अपराह्ण — दोपहर 12 बजे से सूर्यास्त तक का उत्तरार्ध। कुतप न मिले तो अपराह्ण स्वीकार्य।
  3. 3मध्याह्न — दोपहर 12 बजे के आसपास। सामान्यतः स्वीकार्य।

वर्जित

  • प्रातःकाल — सूर्योदय से दोपहर पूर्व = श्राद्ध नहीं।
  • सायंकाल/रात — सूर्यास्त के बाद = श्राद्ध वर्जित।

कारण: पितरों का समय = अपराह्ण/दक्षिणायन। प्रातः = देवताओं का समय; दोपहर = पितरों का।

व्यावहारिक: दोपहर 11-2 बजे = सर्वोत्तम। ब्राह्मण भोज भी इसी समय। पुरोहित से सटीक कुतप काल पूछें।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिंधु, गरुड़ पुराण, श्राद्ध पद्धति
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