विस्तृत उत्तर
प्रयागराज (इलाहाबाद) = तीर्थराज; गंगा-यमुना-सरस्वती त्रिवेणी संगम।
विशेष महत्व
- 1तीर्थराज — सभी तीर्थों में राजा; यहां किया कर्म सर्वोच्च फल देता है।
- 2त्रिवेणी संगम — तीन नदियों का मिलन = त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-शिव) का आशीर्वाद।
- 3अक्षयवट — प्रयागराज में अक्षयवट (अविनाशी वृक्ष) के पास पिंडदान अत्यंत पुण्यदायक।
- 4कुंभ/महाकुंभ — विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन यहीं।
- 5पद्म पुराण — प्रयागराज माहात्म्य विस्तृत; 'प्रयागं सर्वतीर्थेभ्यो विशिष्टम्' = प्रयाग सब तीर्थों से विशिष्ट।
विधि: संगम पर स्नान → तर्पण → अस्थि विसर्जन → पिंडदान → दान। स्थानीय पंडा/पुरोहित से।
कुंभ मेला के समय अस्थि विसर्जन/पिंडदान का फल विशेष गुणित माना जाता है।


