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श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 पद्म पुराण, तीर्थ माहात्म्य1 मिनट पठन

प्रयागराज में अस्थि विसर्जन का विशेष महत्व

संक्षिप्त उत्तर

प्रयागराज = तीर्थराज (सबसे श्रेष्ठ)। त्रिवेणी संगम (गंगा+यमुना+सरस्वती) = त्रिदेव आशीर्वाद। अक्षयवट पिंडदान अत्यंत पुण्यदायक। पद्म पुराण: 'प्रयाग सब तीर्थों से विशिष्ट।' कुंभ में गुणित फल।

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विस्तृत उत्तर

प्रयागराज (इलाहाबाद) = तीर्थराज; गंगा-यमुना-सरस्वती त्रिवेणी संगम।

विशेष महत्व

  1. 1तीर्थराज — सभी तीर्थों में राजा; यहां किया कर्म सर्वोच्च फल देता है।
  2. 2त्रिवेणी संगम — तीन नदियों का मिलन = त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-शिव) का आशीर्वाद।
  3. 3अक्षयवट — प्रयागराज में अक्षयवट (अविनाशी वृक्ष) के पास पिंडदान अत्यंत पुण्यदायक।
  4. 4कुंभ/महाकुंभ — विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन यहीं।
  5. 5पद्म पुराण — प्रयागराज माहात्म्य विस्तृत; 'प्रयागं सर्वतीर्थेभ्यो विशिष्टम्' = प्रयाग सब तीर्थों से विशिष्ट।

विधि: संगम पर स्नान → तर्पण → अस्थि विसर्जन → पिंडदान → दान। स्थानीय पंडा/पुरोहित से।

कुंभ मेला के समय अस्थि विसर्जन/पिंडदान का फल विशेष गुणित माना जाता है।

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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, तीर्थ माहात्म्य
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