लोकमहर्षि दधीचि की अस्थियों का स्वर्लोक से क्या संबंध है?महर्षि दधीचि ने स्वर्लोक की रक्षा के लिए अपना शरीर त्याग दिया। उनकी अस्थियों से बने वज्र से इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया। यह बलिदान स्वर्लोक के इतिहास में अमर है।#दधीचि#अस्थि#वज्र
श्राद्ध एवं पितृ कर्मअस्थि विसर्जन कब और कैसे चुनें3रा दिन = सर्वोत्तम संग्रह। 10 दिन में विसर्जन। नए पात्र में दूध/गंगाजल+तुलसी। गंगा/पवित्र नदी में विसर्जन। विस्तार: प्रश्न 519।#अस्थि#विसर्जन#समय
श्राद्ध एवं पितृ कर्मप्रयागराज में अस्थि विसर्जन का विशेष महत्वप्रयागराज = तीर्थराज (सबसे श्रेष्ठ)। त्रिवेणी संगम (गंगा+यमुना+सरस्वती) = त्रिदेव आशीर्वाद। अक्षयवट पिंडदान अत्यंत पुण्यदायक। पद्म पुराण: 'प्रयाग सब तीर्थों से विशिष्ट।' कुंभ में गुणित फल।#प्रयागराज#संगम#अस्थि
अंत्येष्टि संस्कारअस्थि विसर्जन कहाँ करें गंगा या किसी नदी मेंगंगा सर्वश्रेष्ठ (हरिद्वार/प्रयागराज/वाराणसी)। अन्य: यमुना, गोदावरी, नर्मदा। कोई भी बहती नदी स्वीकार्य। 3रे दिन संग्रह, 10 दिन में विसर्जन। गया पिंडदान = सर्वोत्तम।#अस्थि#विसर्जन#गंगा