विस्तृत उत्तर
प्रयागराज = तीर्थराज (सभी तीर्थों का राजा); गंगा+यमुना+सरस्वती (अदृश्य) त्रिवेणी संगम।
पुण्य: संगम स्नान = 1000 अश्वमेध यज्ञ + 100 वाजपेय यज्ञ तुल्य (पौराणिक मान्यता)। मकर संक्रांति/माघ मेला/कुंभ = विशेष गुणित पुण्य। अस्थि विसर्जन + पिंडदान = सर्वोत्तम। अक्षयवट (अविनाशी वृक्ष) = पास में।
स्नान विधि: संकल्प लें (गोत्र+नाम+प्रयोजन) → 3 डुबकी → तिल-जल तर्पण (पितरों) → दान (ब्राह्मण/गरीब)। नाव से संगम बिंदु तक जाएं (₹50-200)।
कब: वर्षभर; माघ मेला (जनवरी-फरवरी) + कुंभ/महाकुंभ = सर्वोत्तम।





