विस्तृत उत्तर
शारीरिक असमर्थता = तीर्थ न जाने का कारण; पुण्य कम नहीं होता।
उपाय: मानसिक तीर्थ — शास्त्रों में मान्य; आंखें बंद कर तीर्थ ध्यान = पुण्य। वर्चुअल दर्शन — YouTube/TV/ऑनलाइन = भाव प्रधान। प्रतिनिधि — परिवार सदस्य तीर्थ जाकर उनके नाम संकल्प + पूजा + प्रसाद लाएं = पूर्ण पुण्य। घर पूजा — नियमित भक्ति = तीर्थ तुल्य। गीता 9.26 — 'भक्त्या प्रयच्छति' — भक्ति भाव = सर्वोपरि।
गीता 18.66: ईश्वर शरणागति = सबसे बड़ा तीर्थ; शरीर = माध्यम, आत्मा = यात्री। आत्मा का तीर्थ = भक्ति।
सुलभ तीर्थ: कई मंदिरों में wheelchair रैंप (काशी कॉरिडोर, तिरुपति, शिरडी)।





