विस्तृत उत्तर
बुजुर्गों/माता-पिता को तीर्थ ले जाना = सर्वोच्च पुण्य कर्मों में।
पुण्य क्यों: माता-पिता सेवा = सर्वोच्च धर्म (गीता, रामायण — राम ने पिता वचन पालन)। बुजुर्ग = शारीरिक रूप से अक्षम; उनकी तीर्थ इच्छा पूर्ण = अपार पुण्य। 'मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' = माता-पिता = देवता।
बुजुर्ग तीर्थ = उनका मोक्ष मार्ग + आपका पुण्य। पितृ ऋण चुकाना = संतान का कर्तव्य। वृद्धावस्था में तीर्थ = जीवन की सबसे सुखद स्मृति।
व्यावहारिक: स्वास्थ्य जांच (डॉक्टर); आरामदायक यात्रा (AC/flight); सुलभ तीर्थ चुनें (शिरडी/काशी/मथुरा > केदारनाथ/अमरनाथ); wheelchair/पालकी व्यवस्था; दवाईयां साथ।





