विस्तृत उत्तर
मुंबई के प्रभादेवी क्षेत्र में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध और धनाढ्य गणेश मंदिरों में से एक है। इसकी स्थापना 19 नवंबर 1801 को लक्ष्मण विठू और देउबाई पाटिल द्वारा की गई थी। यह मंदिर अष्टविनायक की परंपरागत सूची में नहीं है, किंतु इसकी महत्ता किसी सिद्धपीठ से कम नहीं।
मंदिर की विशेषता — यहाँ गणेश जी की मूर्ति की सूंड दाहिनी ओर मुड़ी है। ऐसे गणपति को सिद्धिविनायक कहते हैं, जो शीघ्र फल देते हैं किंतु पूजा के नियम भी कठोर होते हैं। गर्भगृह में काले पत्थर की ढाई फीट चौड़ी स्वयंभू मूर्ति है। माथे पर भगवान शिव के तीसरे नेत्र जैसी एक आँख है। मंदिर छह मंजिला है, जिसके गुंबद पर सोना चढ़ा है।
दर्शन का समय — सामान्य दिनों में मंदिर प्रातः 5:30 बजे खुलता है और रात्रि 9:50 बजे बंद होता है। मंगलवार को विशेष रूप से मंदिर प्रातः 3:15 बजे से रात 11:30 बजे तक खुला रहता है।
दर्शन के दो द्वार:
- ▸सिद्धि द्वार — निःशुल्क प्रवेश, अतः यहाँ भीड़ अधिक रहती है।
- ▸रिद्धि द्वार — शुल्क देकर शीघ्र दर्शन।
विशेष वर्ग — वरिष्ठ नागरिक, विकलांग और छोटे बच्चों के साथ माताओं के लिए अलग व्यवस्था है।
दर्शन नियम और ड्रेस कोड — मंदिर ट्रस्ट ने पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य की है। छोटे, अशोभनीय, फटे या पश्चिमी कपड़ों में प्रवेश नहीं मिलता। पूर्ण शरीर ढके वस्त्र पहनें।
शुभ दिन — मंगलवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और विनायकी चतुर्थी को यहाँ विशेष भीड़ और विशेष पूजा होती है। मंगलवार को सबसे अधिक भीड़ होती है, इसलिए इस दिन जाने पर लंबी प्रतीक्षा के लिए तैयार रहें। सोमवार, बुधवार या गुरुवार की सुबह जाना अपेक्षाकृत सुगम है।
आरती — प्रतिदिन काकड आरती (प्रातः), मध्याह्न आरती और शेज आरती (रात्रि) होती है।





