विस्तृत उत्तर
तीर्थ से लौटकर:
घर प्रवेश पूर्व स्नान (या कम से कम हाथ-पैर धोएं)। गृह देवता/कुल देवता दर्शन+तीर्थ जल अर्पित। प्रसाद परिवार+पड़ोसी+बुजुर्गों को बांटें। तीर्थ जल (गंगाजल आदि) पूजा स्थल में रखें। गरीबों/ब्राह्मणों को भोजन/दान (यथाशक्ति)।
कुछ परंपरा: तीर्थ से लौटकर 1-3 दिन सात्विक भोजन; मंत्र जप जारी रखें। तीर्थ अनुभव = जीवन में लागू करें (केवल फोटो/वीडियो नहीं)।
महत्वपूर्ण: तीर्थ = भक्ति बीज; घर लौटकर नियमित पूजा = बीज को पौधा बनाना। केवल तीर्थ जाकर फिर वही जीवन = अपूर्ण।





