विस्तृत उत्तर
अनिवार्य नहीं, परंतु अत्यंत शुभ और परंपरा।
क्यों दें: तीर्थ पुण्य बांटना = पुण्य बढ़ता (गुणित)। प्रसाद = ईश्वर कृपा; बांटना = कृपा विस्तार। परिवार/पड़ोसी = तीर्थ न जा सकें; प्रसाद = उन्हें भी लाभ। सामाजिक बंधन = प्रेम/सद्भाव।
क्या लाएं: प्रसाद (लड्डू/पेड़ा), तीर्थ जल (गंगाजल/तीर्थ जल), भस्म/कुमकुम, तुलसी माला/रुद्राक्ष, चित्र/मूर्ति (छोटी)।
किसे दें: परिवार, पड़ोसी, मित्र, बुजुर्ग (विशेष), गरीब/जरूरतमंद। सबको = सर्वोत्तम। श्रद्धा से दें; मात्रा गौण।





