विस्तृत उत्तर
तीर्थ यात्रा = आध्यात्मिक यात्रा; शरीर+मन शुद्ध = पूर्ण फल।
सात्विक भोजन (शाकाहारी, ताजा, सरल) तीर्थ पर क्यों: मन शांत रहता है — तामसिक (मांस/शराब/तला) = मन अशांत, ध्यान भटकता। शरीर हल्का = पैदल यात्रा/पहाड़ आसान। तीर्थ स्थल = पवित्र ऊर्जा; सात्विक शरीर अधिक ग्रहण करता। गीता 17.8 — सात्विक भोजन = आयु, बल, सुख, प्रीति बढ़ाने वाला।
क्या खाएं: फल, दूध, दही, खिचड़ी, रोटी-सब्जी, दाल-चावल। क्या न खाएं: मांसाहार, शराब, प्याज-लहसुन (कुछ परंपरा), अत्यधिक तला/मसालेदार।
व्यावहारिक: कम से कम तीर्थ दर्शन के दिन सात्विक = न्यूनतम। पूरी यात्रा = उत्तम।





