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भोजन प्रश्नोत्तरी — 29 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित भोजन विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 29 प्रश्न

लोक

महर्लोक में निवासी भोजन कैसे करते हैं?

महर्लोक के निवासी अन्न-जल पर निर्भर नहीं। वे योग-अग्नि और परब्रह्म के ध्यान से ही पोषण प्राप्त करते हैं। यहाँ भूख का पूर्णतः अभाव है।

महर्लोकभोजनयोग-अग्नि
लोक

स्वर्ग में भोजन और वस्त्र कैसे मिलते हैं?

स्वर्ग में कल्पवृक्ष से इच्छानुसार भोजन मिलता है, दिव्य झीलों में दूध-शहद-रस है और कुमुद पर्वत के बरगद से वस्त्र और आभूषण भी प्राप्त होते हैं।

स्वर्गभोजनवस्त्र
त्योहार

कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को भोजन कराएँ?

9 कन्या=नवदुर्गा(सर्वोत्तम)+1 लांगुर(भैरव)=10। 7/5/2/1=भी मान्य। पूरी+हलवा+चना+खीर। पैर धोएँ→तिलक→भोजन→दक्षिणा। संख्या<भाव — 1 सच्ची>100 दिखावा।

कन्या पूजनसंख्याभोजन
श्राद्ध विधि

श्राद्ध में कौन से पकवान बनाने चाहिए?

अनिवार्य: खीर (सबसे जरूरी), पूरी (घी), चावल, उड़द दाल, कद्दू/लौकी, गुड़। तिल+जौ+शहद+तुलसी। वर्जित: मांस, प्याज-लहसुन, लोहे बर्तन। पहले पंचबलि (गाय/कुत्ता/कौवा/चींटी/अग्नि)।

श्राद्ध पकवानभोजनखीर पूरी
मंत्र जप नियम

मंत्र अनुष्ठान के दौरान भोजन में क्या खाएं और क्या नहीं?

सात्विक: दूध/घी/फल/चावल/मूंग/खीर/मेवा। वर्जित: प्याज-लहसुन, मांस-मदिरा, बासी, तीखा/खट्टा। एक समय (कठोर) / दो (सामान्य)। घर का ताजा। फलाहार उत्तम।

भोजनअनुष्ठानखाएं
नित्य कर्म

भोजन शुद्धि का मंत्र

भोजन ग्रहण करने से पूर्व अन्न के दोषों को नष्ट करने और उसे प्रसाद बनाने के लिए गीता के श्लोक 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ...' का उच्चारण करना चाहिए।

भोजनअन्न दोषशुद्धि
नित्य कर्म

अन्नपूर्णा मंत्र भोजन से पहले

भोजन से पूर्व 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' मंत्र का उच्चारण करने से अन्न के दोष नष्ट होते हैं, भोजन प्रसाद बन जाता है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।

अन्नपूर्णाभोजनकृतज्ञता
लोक

आधी रोटी बांटने का धार्मिक महत्व क्या है?

कम में भी बाँटना करुणा और धर्म का बड़ा रूप है।

दानभोजनअतिथि
लोक

नवमी श्राद्ध में पंचबलि क्या है?

पांच जीवों के लिए अन्न अर्पण।

पंचबलिनवमी श्राद्धभोजन
लोक

सत्यलोक के निवासी भोजन क्यों नहीं करते?

सत्यलोक के निवासी विशुद्ध सत्वगुणी और चिन्मय शरीर के कारण भौतिक अन्न से नहीं बल्कि ध्यान, ज्ञान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से पोषण पाते हैं।

सत्यलोकभोजनध्यान
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को भोजन न मिलने पर क्या होता है?

प्रेत को भोजन न मिलने पर — असहनीय भूख की पीड़ा, यात्रा में असमर्थता, वैतरणी में रक्त-पान को विवश और यात्रा न कर पाने से दीर्घ भटकन। गरुड़ पुराण में यही दुर्दशा बताई गई है।

प्रेतभोजनभूख
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को भोजन कैसे मिलता है?

प्रेत को भोजन पिंडदान से मिलता है। दस दिनों का पिंड शरीर-निर्माण और शक्ति देता है। श्राद्ध में दिया गया अन्न, जल और तर्पण भी पहुँचता है। बिना पिंडदान के प्रेत भूखा-प्यासा भटकता है।

प्रेतभोजनपिंडदान
जीवन एवं मृत्यु

यममार्ग में जीव को भोजन किस रूप में मिलता है?

यममार्ग पर जीव को पिंडदान से भोजन और शक्ति मिलती है। दानी जीवों को अपने जीवन के दान का फल मिलता है। पापी और पिंडदानविहीन जीव को कुछ नहीं मिलता — वह भूखा-प्यासा यातना सहता हुआ चलता है।

यममार्गभोजनपिंडदान
जीवन एवं मृत्यु

क्या नरक में जीव को भोजन मिलता है?

नरक में जीव को सात्विक भोजन नहीं मिलता। भूख-प्यास की यातना होती है। रक्त-वमन पीने, मल खाने और जहर पीने पर विवश किया जाता है। जिसने जीवन में अन्नदान नहीं किया उसे यह कष्ट सर्वाधिक होता है।

नरकभोजनभूख
नित्य कर्म

भोजन के बाद जपने वाला अगस्त्य मंत्र कौन सा है और इसके क्या लाभ हैं

भोजन के बाद महर्षि अगस्त्य के मंत्र का जप करते हुए पेट पर हाथ फेरने से पाचन शक्ति बढ़ती है।

भोजनपाचनअगस्त्य
तीर्थ यात्रा

तीर्थ यात्रा में सात्विक भोजन क्यों करें

मन शांत, शरीर हल्का, पवित्र ऊर्जा अधिक ग्रहण। गीता 17.8। फल/दूध/खिचड़ी/दाल-चावल। मांस/शराब/तला वर्जित। कम से कम दर्शन दिन सात्विक।

तीर्थसात्विकभोजन
श्राद्ध एवं पितृ कर्म

पितृपक्ष में गरीबों को भोजन कराने का पुण्य

गरीब भोजन = पितर तृप्ति + विष्णु सेवा + ब्राह्मण भोज समकक्ष (प्रश्न 583)। मृतक नाम से संकल्प करके खिलाएं। अनाथालय/वृद्धाश्रम = अत्यंत पुण्यदायक। पितृपक्ष में सर्वोच्च पुण्य कर्म।

पितृपक्षगरीबभोजन
दैनिक आचार

भोजन के बाद कौन सा मंत्र बोलें

'अन्नदाता सुखी भव' (सरलतम)। या गीता 15.14 — वैश्वानर अग्नि। या 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'। भोजन पूर्व=भोग, बाद=कृतज्ञता — दोनों मिलकर संपूर्ण भोजन संस्कार।

भोजनबादमंत्र
दैनिक आचार

सूतक में भोजन कैसा बनाएं और कौन बनाए

सादा/सात्विक, शाकाहारी, ताजा। मिठाई/मांसाहार वर्जित। बनाने वाला: परिवार (स्नानकृत) या बाहर का व्यक्ति (सूतकरहित)। 13 दिन बाद शुद्धि → सामान्य भोजन।

सूतकभोजननियम
दैनिक आचार

ग्रहण काल में खाना पीना बंद करना जरूरी है क्या

परंपरा: ग्रहण काल में भोजन/जल वर्जित (धर्मसिंधु)। सूतक 12 घंटे पहले (सूर्य)/9 घंटे (चंद्र)। बाद: स्नान, दान, पुराना भोजन त्यागें। वैज्ञानिक प्रमाण अभाव। बीमार/बच्चे/गर्भवती: स्वास्थ्य > परंपरा।

ग्रहणसूतकभोजन
दैनिक आचार

भोजन करते समय किस दिशा में मुख करके बैठें

पूर्व (सर्वोत्तम — पाचन) या उत्तर (समृद्धि)। दक्षिण वर्जित। बैठकर खाएं। भोग अवश्य लगाएं। विस्तार: प्रश्न 143।

भोजनदिशावास्तु
दैनिक आचार

भोजन से पहले भगवान को भोग लगाना जरूरी है क्या

हाँ — गीता 3.13 अनुसार। भोजन पहले भगवान को अर्पित, फिर प्रसाद रूप में ग्रहण। 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः...' (गीता 4.24)। संभव न हो तो मन में ईश्वर स्मरण = न्यूनतम भोग।

भोगभोजननैवेद्य
वास्तु शास्त्र

वास्तु के अनुसार घर में कौन सी दिशा में खाना खाएं

भोजन करते समय मुख पूर्व (सर्वोत्तम — पाचन) या उत्तर (समृद्धि) की ओर हो। भोजन कक्ष पश्चिम या रसोई के पास शुभ। बैठकर, शांत वातावरण में, भगवान को भोग लगाकर भोजन करें।

भोजनदिशाभोजन कक्ष
पूजा विधि

भगवान की मूर्ति के सामने खाना खा सकते हैं या नहीं

पूजा स्थल में बैठकर सामान्य भोजन करना उचित नहीं — अशुद्धि और अनादर का भय। प्रसाद ग्रहण करना शुभ है। यदि मूर्ति सामने दिखती है तो भोजन के समय पर्दा बंद करें। भोजन से पहले भोग अवश्य लगाएं।

मूर्तिभोजनपूजा घर

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।