विस्तृत उत्तर
हाँ, शास्त्रीय परंपरा में भोजन से पहले भगवान को भोग (नैवेद्य) लगाना अनिवार्य माना गया है।
शास्त्रीय आधार
- ▸'देवपितृभ्यो अनुमत्य शेषं प्राश्नीयात्' — देव और पितरों को अर्पित करके शेष ग्रहण करें।
- ▸गीता 3.13 — यज्ञ शेष खाने वाले पुण्यात्मा हैं; बिना अर्पित खाने वाले पाप खाते हैं।
सरल विधि
- 1भोजन बनने पर पहले भगवान को भोग लगाएं।
- 2'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणाहुतम्' (गीता 4.24) या 'ॐ प्राणाय स्वाहा...' बोलें।
- 35-10 मिनट रखें, फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
यदि संभव न हो
कम से कम भोजन पूर्व मन में भगवान का स्मरण करें — यही न्यूनतम भोग है।





