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दैनिक आचार📜 विष्णु पुराण, धर्मसिंधु, षोडशोपचार पद्धति1 मिनट पठन

भोजन से पहले भगवान को भोग लगाना जरूरी है क्या

संक्षिप्त उत्तर

हाँ — गीता 3.13 अनुसार। भोजन पहले भगवान को अर्पित, फिर प्रसाद रूप में ग्रहण। 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः...' (गीता 4.24)। संभव न हो तो मन में ईश्वर स्मरण = न्यूनतम भोग।

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विस्तृत उत्तर

हाँ, शास्त्रीय परंपरा में भोजन से पहले भगवान को भोग (नैवेद्य) लगाना अनिवार्य माना गया है।

शास्त्रीय आधार

  • 'देवपितृभ्यो अनुमत्य शेषं प्राश्नीयात्' — देव और पितरों को अर्पित करके शेष ग्रहण करें।
  • गीता 3.13 — यज्ञ शेष खाने वाले पुण्यात्मा हैं; बिना अर्पित खाने वाले पाप खाते हैं।

सरल विधि

  1. 1भोजन बनने पर पहले भगवान को भोग लगाएं।
  2. 2'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणाहुतम्' (गीता 4.24) या 'ॐ प्राणाय स्वाहा...' बोलें।
  3. 35-10 मिनट रखें, फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

यदि संभव न हो

कम से कम भोजन पूर्व मन में भगवान का स्मरण करें — यही न्यूनतम भोग है।

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शास्त्रीय स्रोत
विष्णु पुराण, धर्मसिंधु, षोडशोपचार पद्धति
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