विस्तृत उत्तर
प्रसाद (भगवान का भोग/नैवेद्य) बनाते समय चखना = वर्जित — यह सर्वसम्मत नियम है।
कारण
- 1जूठा — चखने से भोजन जूठा हो जाता है; जूठा भगवान को नहीं चढ़ाते।
- 2भगवान पहले — 'देवपितृभ्यो अनुमत्य शेषं प्राश्नीयात्' — पहले देव को, फिर स्वयं। चखना = पहले खाना।
- 3वैष्णव नियम — ISKCON/वैष्णव परंपरा में यह अत्यंत कठोर; कृष्ण को अर्पित करने से पहले कोई नहीं चखता।
व्यावहारिक समाधान
- ▸नमक/मसाला = अनुभव से डालें; बार-बार बनाने से अंदाजा आ जाता है।
- ▸यदि चखना आवश्यक हो = चम्मच से अलग कटोरी में निकालें, चखें, चम्मच बदलें। परंतु यह भी कुछ परंपराओं में अस्वीकार्य।
प्रसाद vs सामान्य भोजन: यह नियम प्रसाद/भोग पर लागू। सामान्य भोजन चखना स्वाभाविक और स्वीकार्य।





