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भोजन के बाद कौन सा मंत्र बोलें

संक्षिप्त उत्तर

'अन्नदाता सुखी भव' (सरलतम)। या गीता 15.14 — वैश्वानर अग्नि। या 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'। भोजन पूर्व=भोग, बाद=कृतज्ञता — दोनों मिलकर संपूर्ण भोजन संस्कार।

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विस्तृत उत्तर

भोजन के बाद ईश्वर को धन्यवाद और अन्न देने वालों को कृतज्ञता:

मंत्र

  1. 1'अन्नदाता सुखी भव' — अन्न देने वाले सुखी हों। सबसे सरल और प्रचलित।
  2. 2'ॐ ह्यग्निर्वैश्वानरो...' — वैश्वानर अग्नि (जठराग्नि) मंत्र।
  3. 3गीता 15.14: 'अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः। प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम्।।' — मैं (ईश्वर) वैश्वानर अग्नि रूप में प्राणियों के शरीर में रहकर अन्न पचाता हूं।
  4. 4सरलतम: 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः' या 'भगवान, धन्यवाद'।

सार: भोजन पूर्व = भोग (भगवान को अर्पित); भोजन बाद = कृतज्ञता। दोनों = संपूर्ण भोजन संस्कार।

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शास्त्रीय स्रोत
नित्यकर्म पद्धति, भक्ति परंपरा
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