की चेकलिस्ट
'अन्नदाता सुखी भव' (सरलतम)। या गीता 15.14 — वैश्वानर अग्नि। या 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'। भोजन पूर्व=भोग, बाद=कृतज्ञता — दोनों मिलकर संपूर्ण भोजन संस्कार।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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